कोट गांव की जमीन बचाने के लिए ग्रामवासी एकजुट, अवैध रजिस्ट्रियों पर मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग
टिहरी गढ़वाल।
विकासखंड थौलधार के कोट गांव में वर्षों से चली आ रही जमीनों की अवैध खरीद–फरोख्त और फर्जी रजिस्ट्रियों के खिलाफ अब ग्राम पंचायत और ग्रामीण खुलकर सामने आ गए हैं। ग्राम प्रधान श्रीमती ममता भट्ट ने इस गंभीर मामले को लेकर जिलाधिकारी टिहरी गढ़वाल के माध्यम से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को पत्र भेजकर तत्काल संज्ञान और कठोर कार्रवाई की मांग की है।

प्रधान द्वारा भेजे गए प्रस्ताव/ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि गांव की सीमांत कृषि भूमि को बिना सह-खातेदारों की सहमति, बिना गांव के गवाहों और कई मामलों में परिजनों की जानकारी के बिना, बाहरी लोगों के नाम रजिस्ट्री कर दी गई। पत्र के अनुसार बीते कुछ वर्षों में लगभग 2700 खेतों की जमीन इस तरह विवादों में फंस चुकी है।
भू-माफियाओं के जाल में फंसे ग्रामीण
पत्र में यह भी उल्लेख है कि रोजगार की तलाश में दिल्ली-मुंबई जैसे शहरों में रह रहे ग्रामीणों के बैंक खातों और दस्तावेजों का दुरुपयोग कर टोकन मनी के नाम पर लाखों रुपये का लालच देकर जमीन बिकवाई गई। बाद में कई परिवार कानूनी विवादों में उलझ गए और गांव में पारिवारिक कलह तक की स्थिति बन गई।
चारागाह, रास्ते और सार्वजनिक भूमि पर भी खतरा
ग्राम सभा ने स्पष्ट किया है कि गांव के चारागाह, रास्ते, पूजा स्थल, मेला स्थल और सार्वजनिक भूमि पर भी भू-माफियाओं की नजर है। ग्रामीणों ने मांग की है कि ऐसे मामलों में ग्राम सभा की स्पष्ट अनुमति और शपथ पत्र के बिना कोई भी रजिस्ट्री न की जाए।
गांव बचाने के लिए एकजुट हुए लोग

सबसे अहम बात यह है कि अब कोट गांव के ग्रामीण अपनी पैतृक भूमि और गांव की पहचान बचाने के लिए एकजुट हो गए हैं। ग्राम सभा में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर सरकार से हिमाचल प्रदेश की तर्ज पर सख्त भू-कानून लागू करने की मांग की गई है, ताकि पहाड़ों में हो रहे अंधाधुंध भूमि हस्तांतरण पर रोक लग सके।
मुख्यमंत्री से सख्त कार्रवाई की मांग
ग्राम प्रधान ममता भट्ट ने मांग की है कि—
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सह-खातेदारों की लिखित सहमति के बिना रजिस्ट्री पर रोक लगे
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पुराने संदिग्ध भूमि सौदों की उच्चस्तरीय जांच हो
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भू-माफियाओं और इसमें शामिल अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए
ग्रामीणों को उम्मीद है कि मुख्यमंत्री इस संवेदनशील मुद्दे पर शीघ्र हस्तक्षेप करेंगे, ताकि कोट गांव की जमीन, संस्कृति और भविष्य सुरक्षित रह सके।
