उत्तराखंड विधानसभा नियुक्ति मामला: हाईकोर्ट ने जनहित याचिका निस्तारित की, लंबित याचिकाओं पर असर नहीं
नैनीताल/देहरादून: उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने उत्तराखंड विधानसभा में कथित अवैध नियुक्तियों से जुड़ी जनहित याचिका (पीआईएल) को निस्तारित कर दिया है। मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने मामले को रिकॉर्ड पर भेजते हुए स्पष्ट किया कि इस फैसले का सेवा समाप्त कर्मचारियों की ओर से दायर लंबित याचिकाओं पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
बिना विज्ञापन और चयन प्रक्रिया के नियुक्तियों का आरोप
याचिकाकर्ता अभिनव थापर ने जनहित याचिका में आरोप लगाया था कि राज्य गठन के बाद उत्तराखंड विधानसभा में कई नियुक्तियां संविधान और निर्धारित नियमों का उल्लंघन करते हुए बिना विज्ञापन और चयन प्रक्रिया के की गईं।
याचिका में तीन प्रमुख मांगें रखी गई थीं:
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विधानसभा की सभी भर्तियों के मूल अभिलेख न्यायालय में प्रस्तुत किए जाएं
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न्यायिक सदस्य की अध्यक्षता में विशेष जांच दल (SIT) गठित कर उच्चस्तरीय जांच कराई जाए
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6 फरवरी 2003 के शासनादेश के अनुसार अनियमित नियुक्त कर्मियों पर हुए वेतन-भत्तों के खर्च की जिम्मेदार अधिकारियों से वसूली की जाए
2001 से 2021 तक 396 एडहॉक नियुक्तियां स्वीकार
सुनवाई के दौरान दाखिल शपथपत्र में यह स्वीकार किया गया कि वर्ष 2001 से 2021 के बीच कुल 396 एडहॉक नियुक्तियां की गईं। इनमें से:
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166 कर्मचारियों को वर्ष 2015 में नियमित किया गया
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227 कर्मचारियों की सेवाएं 23 सितंबर 2022 को समाप्त कर दी गईं
खंडपीठ ने माना कि प्रतिवादी पक्ष द्वारा जांच कर कार्रवाई की जा चुकी है और जिम्मेदार व्यक्तियों की पहचान भी कर ली गई है। ऐसे में इस जनहित याचिका में अतिरिक्त निर्देश देने की आवश्यकता नहीं है।
पूर्व स्पीकर और मुख्यमंत्रियों के निर्देश पर हुईं नियुक्तियां
अदालत के निर्देश पर 9 जुलाई 2024 को दाखिल हलफनामे में बताया गया कि संबंधित नियुक्तियां तत्कालीन विधानसभा अध्यक्षों के निर्देश पर और तत्कालीन मुख्यमंत्रियों की सहमति से की गई थीं। हालांकि, विधानसभा सचिवालय ने इन नियुक्तियों पर आपत्ति दर्ज कराई थी।
प्रतिवादी पक्ष ने यह भी बताया कि जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर अवैध नियुक्तियों को समाप्त किया गया और जिम्मेदार व्यक्तियों की पहचान कर ली गई है।
लंबित याचिकाओं पर नहीं पड़ेगा असर
अदालत ने स्पष्ट किया कि सेवा समाप्त किए गए कर्मचारियों द्वारा दायर रिट याचिकाएं अभी विचाराधीन हैं और इस जनहित याचिका के निस्तारण का उन मामलों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
