अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का ट्रंप को झटका, ग्लोबल टैरिफ़ रद्द 6–3 के बहुमत से फैसला, राष्ट्रपति के अधिकारों की सीमा तय

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अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का ट्रंप को झटका, ग्लोबल टैरिफ़ रद्द

6–3 के बहुमत से फैसला, राष्ट्रपति के अधिकारों की सीमा तय

वॉशिंगटन, डी.सी.: अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump की आर्थिक नीतियों को बड़ा झटका देते हुए Supreme Court of the United States ने उनके द्वारा लगाए गए वैश्विक टैरिफ़ को असंवैधानिक ठहराते हुए रद्द कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने 6–3 के बहुमत से यह ऐतिहासिक फैसला सुनाया, जिसमें कहा गया कि राष्ट्रपति ने अपने अधिकारों की सीमा से बाहर जाकर टैरिफ़ लगाए थे।

क्या था मामला

दरअसल, राष्ट्रपति ट्रंप ने 2025 में चीन, मेक्सिको, कनाडा समेत दुनिया के कई देशों से अमेरिका में आने वाले सामान पर 10 प्रतिशत से लेकर 50 प्रतिशत तक टैरिफ़ लगाने की घोषणा की थी। उनका दावा था कि इन टैरिफ़ से अमेरिकी उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा, घरेलू उत्पादन मजबूत होगा और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

हालांकि, इन टैरिफ़ को लागू करने के लिए ट्रंप प्रशासन ने अमेरिकी संसद यानी कांग्रेस की मंजूरी नहीं ली। इसके बजाय, उन्होंने 1977 के International Emergency Economic Powers Act (IEEPA) का इस्तेमाल करते हुए राष्ट्रीय आपात स्थिति का हवाला देकर सीधे आदेश जारी कर दिए।

यह कानून राष्ट्रपति को आपात स्थिति में अंतरराष्ट्रीय व्यापार को नियंत्रित करने की अनुमति देता है, लेकिन इसमें टैरिफ़ लगाने की स्पष्ट शक्ति का उल्लेख नहीं है।

अपील कोर्ट ने भी बताया था गैरकानूनी

इससे पहले अगस्त 2025 में एक अमेरिकी अपील कोर्ट ने ट्रंप के अधिकांश टैरिफ़ को गैरकानूनी करार दिया था। हालांकि, उस समय कोर्ट ने टैरिफ़ को तुरंत हटाने का आदेश नहीं दिया था, जिससे वे लागू रहे।

इसके बाद व्हाइट हाउस ने अपील कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की, उम्मीद थी कि सर्वोच्च अदालत राष्ट्रपति के फैसले को बरकरार रखेगी।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति ने नेशनल इमरजेंसी कानून का इस्तेमाल करके अपने अधिकारों का अतिक्रमण किया है। अदालत ने कहा कि:

  • IEEPA राष्ट्रपति को व्यापार को नियंत्रित करने की अनुमति देता है,

  • लेकिन यह कानून राष्ट्रपति को एकतरफा टैरिफ़ लगाने का अधिकार नहीं देता,

  • टैरिफ़ लगाने की संवैधानिक शक्ति कांग्रेस के पास है, न कि राष्ट्रपति के पास।

यह फैसला राष्ट्रपति की कार्यकारी शक्तियों पर संवैधानिक सीमा तय करने वाला महत्वपूर्ण निर्णय माना जा रहा है।

सभी टैरिफ़ नहीं हुए रद्द

हालांकि, ट्रंप द्वारा लगाए गए सभी टैरिफ़ इस फैसले से प्रभावित नहीं हुए हैं। स्टील, एल्युमीनियम, लकड़ी और ऑटोमोबाइल से जुड़े टैरिफ़ अभी भी लागू रहेंगे। ये टैरिफ़ 1962 के Trade Expansion Act की धारा 232 के तहत राष्ट्रीय सुरक्षा के आधार पर लगाए गए थे, जो इस मामले से अलग कानूनी प्रावधान के अंतर्गत आते हैं।

ट्रंप ने जताई थी आशंका

राष्ट्रपति ट्रंप पहले ही चेतावनी दे चुके थे कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला उनकी आर्थिक नीतियों और टैरिफ़ लगाने की क्षमता को सीमित कर सकता है। लेकिन अदालत ने उनकी चिंताओं को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि संवैधानिक शक्तियों का संतुलन बनाए रखना आवश्यक है।

व्यापक राजनीतिक और कानूनी असर

विशेषज्ञों के अनुसार, यह फैसला सिर्फ टैरिफ़ तक सीमित नहीं है, बल्कि राष्ट्रपति के कार्यकारी अधिकारों की सीमा तय करने वाला एक महत्वपूर्ण उदाहरण है। ट्रंप प्रशासन के अन्य फैसले, जैसे जन्मसिद्ध नागरिकता समाप्त करने की कोशिश और संघीय अधिकारियों को हटाने से जुड़े विवाद, भी अदालत में चुनौती के दायरे में हैं। ऐसे में आने वाले समय में ट्रंप को अन्य मामलों में भी न्यायिक चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।


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