उत्तराखंड के पहाड़ों में सदियों से चले आ रहे कई पारंपरिक पेशे आज धीरे-धीरे समाप्त होने की कगार पर हैं। रिंगाल शिल्प, ऊन बुनाई, लोहारगिरी और ढोल-दमाऊं जैसे हुनर कभी ग्रामीण अर्थव्यवस्था और संस्कृति की रीढ़ माने जाते थे। लेकिन आधुनिकता, मशीनों और बदलती जीवनशैली के कारण इन पारंपरिक पेशों की मांग लगातार कम होती जा रही है। इस विशेष रिपोर्ट में जानिए कि क्यों खत्म हो रहे हैं पहाड़ के ये अनमोल हुनर, और इनके साथ क्या खो रही है उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान।