हरिद्वार में अमित शाह का दो दिवसीय दौरा: शांतिकुंज शताब्दी समारोह से लेकर पतंजलि हॉस्पिटल उद्घाटन तक, राष्ट्रजागरण का संदेश
हरिद्वार। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने दो दिवसीय उत्तराखंड दौरे के तहत हरिद्वार में तीन प्रमुख कार्यक्रमों में शिरकत की। बुधवार शाम ऋषिकेश से हरिद्वार पहुंचे अमित शाह ने पहले कनखल स्थित हरिहर आश्रम में जूना अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरी से मुलाकात कर आशीर्वाद लिया। इसके बाद उन्होंने पतंजलि योगपीठ में रात्रि विश्राम किया। गुरुवार सुबह पतंजलि योगपीठ में “पतंजलि इमरजेंसी एंड क्रिटिकल केयर हॉस्पिटल” का शुभारंभ किया और फिर उत्तरी हरिद्वार स्थित गायत्री पीठ शांतिकुंज पहुंचे, जहां अखंड ज्योति के दर्शन किए। इसके बाद बैरागी कैंप में आयोजित शांतिकुंज के शताब्दी समारोह में दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का उद्घाटन किया।

शांतिकुंज के शताब्दी समारोह में अपने संबोधन में अमित शाह ने पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य और माता भगवती देवी शर्मा के योगदान को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि उन्होंने अपने जीवनकाल में “कई युगों का काम” किया। उनके आंदोलन से जुड़े 15 करोड़ से अधिक अनुयायी आज आध्यात्मिकता के मार्ग पर अग्रसर हैं। उन्होंने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड में कदम रखते ही हजारों वर्षों की तपस्या की अनुभूति होती है। हरिद्वार कुंभ भूमि और सप्त ऋषियों की तपोभूमि है, जहां साधु-संतों की साधना ने भारत की आध्यात्मिक चेतना को दिशा दी है।
अमित शाह ने शांतिकुंज के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि यहां उन्हें अखंड ऊर्जा और चेतना का अनुभव हुआ। उन्होंने बताया कि आस्था, अध्यात्म और संस्कृति को पुनर्जीवित करने के लिए शांतिकुंज के संस्थापकों ने “व्यक्ति निर्माण” का मार्ग चुना। पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य ने गायत्री मंत्र के माध्यम से भक्ति को मंदिर के गर्भगृह से निकालकर जन-जन की जिह्वा तक पहुंचाया और हर जाति, समाज व लिंगभेद के बगैर आत्मकल्याण का रास्ता दिखाया। उन्होंने कहा कि आज करोड़ों लोग गायत्री उपासना और साधना से जुड़े हैं, और चिन्मय पंड्या के नेतृत्व में यह आंदोलन नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़े—यह उन सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
उन्होंने 1925-26 को राष्ट्रीय पुनर्जागरण का वर्ष बताते हुए कहा कि उसी काल में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना, गीता प्रेस गोरखपुर की शुरुआत, वंदनीय माता जी और पूज्य गुरुदेव का जन्मशताब्दी काल तथा अखंड ज्योति का प्रज्वलन—ये सभी घटनाएं एक साथ होना ईश्वर की ओर से भारत के पुनर्जागरण का संकेत है। अमित शाह ने कहा कि आध्यात्मिक रूप से भारत का पुनर्निर्माण पूरे विश्व के लिए कल्याणकारी सिद्ध होगा।
पतंजलि योगपीठ में इमरजेंसी एंड क्रिटिकल केयर हॉस्पिटल के उद्घाटन अवसर पर अमित शाह ने कहा कि आधुनिक चिकित्सा और भारतीय परंपरा का संगम जन-स्वास्थ्य के लिए नई राह खोलेगा। उन्होंने योगगुरु स्वामी रामदेव और आचार्य बालकृष्ण के प्रयासों की सराहना की। कार्यक्रमों में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत, मंत्री धन सिंह रावत, हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला, यूपी के परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट सहित कई जनप्रतिनिधि और अधिकारी मौजूद रहे।
शताब्दी समारोह में राष्ट्रजागरण का संकल्प लिया गया। प्रज्ञा गीतों के साथ अतिथियों का भव्य स्वागत हुआ। अमित शाह ने कहा कि आज़ादी की शताब्दी 2047 तक भारत को ऐसा पूर्ण विकसित राष्ट्र बनाना है जो भौतिक उन्नति के साथ आध्यात्मिकता में भी विश्व का मार्गदर्शक हो। उन्होंने पिछले दस वर्षों में हुए परिवर्तनों का उल्लेख करते हुए अयोध्या में भव्य राम मंदिर, काशी विश्वनाथ कॉरिडोर, सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण, अनुच्छेद 370 की समाप्ति और समान नागरिक संहिता की दिशा में बढ़ते कदमों का जिक्र किया।
अमित शाह के दौरे को लेकर पुलिस प्रशासन ने कड़े सुरक्षा इंतजाम किए थे। चप्पे-चप्पे पर पुलिस बल तैनात रहा। कुल मिलाकर हरिद्वार में उनका दौरा आध्यात्मिक चेतना, स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार और राष्ट्रजागरण के संदेश के साथ संपन्न हुआ।
