अंकिता भंडारी हत्याकांड: तीन साल बाद CBI जांच की संस्तुति, केंद्र सरकार लेगी अंतिम फैसला
देहरादून | विशेष रिपोर्ट
उत्तराखंड के बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में तीन साल बाद बड़ा मोड़ आया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस मामले की सीबीआई जांच की संस्तुति दे दी है। अब इस पर अंतिम निर्णय केंद्र सरकार द्वारा लिया जाएगा। यह फैसला अंकिता भंडारी के माता–पिता से मुलाकात और लगातार बढ़ते जनदबाव के बाद लिया गया है।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि सरकार ने शुरू से ही इस प्रकरण में संवेदनशीलता, निष्पक्षता और पारदर्शिता के साथ कार्रवाई की। घटना की जानकारी मिलते ही एक महिला आईपीएस अधिकारी के नेतृत्व में विशेष जांच दल (SIT) गठित किया गया, सभी आरोपियों को शीघ्र गिरफ्तार किया गया और राज्य सरकार की ओर से प्रभावी पैरवी सुनिश्चित की गई। उन्होंने कहा कि सरकार की संवेदनाएं अंकिता के परिवार के साथ हैं और किसी भी तथ्य या साक्ष्य की अनदेखी नहीं होगी।
तीन साल बाद फिर क्यों चर्चा में आया मामला?
दरअसल, हाल ही में भाजपा से निष्कासित पूर्व विधायक सुरेश राठौर की कथित पत्नी उर्मिला सनावर द्वारा सोशल मीडिया पर जारी वीडियो और ऑडियो क्लिप्स के बाद यह मामला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया। फेसबुक लाइव के दौरान महिला ने अंकिता हत्याकांड में एक कथित “वीआईपी” का जिक्र किया और दावा किया कि एक पूर्व जिला पंचायत सदस्य के पास इससे जुड़ी अहम जानकारी है। इसके बाद प्रदेशभर में विरोध प्रदर्शन तेज हो गए और सीबीआई जांच की मांग जोर पकड़ने लगी।
कांग्रेस और संगठनों का आंदोलन, उत्तराखंड बंद का ऐलान
मामला फिर से तूल पकड़ने के बाद कांग्रेस समेत कई राजनीतिक और सामाजिक संगठनों ने धरना–प्रदर्शन शुरू कर दिए। सीबीआई जांच की मांग को लेकर 11 जनवरी को उत्तराखंड बंद का भी ऐलान किया गया है।
तीनों आरोपियों को उम्रकैद, फिर भी अनसुलझा ‘वीआईपी’ सवाल
हालांकि इस मामले में मुख्य आरोपी पुलकित आर्य, सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता को अदालत द्वारा आजीवन कारावास की सजा सुनाई जा चुकी है, लेकिन हत्याकांड की रात रिजॉर्ट में आए कथित वीआईपी की पहचान अब भी सार्वजनिक नहीं हो पाई है। यही वजह है कि मामला लगातार चर्चा में बना हुआ है।
क्या बोले मुख्यमंत्री धामी?
सीएम धामी ने कहा कि हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर वायरल ऑडियो–वीडियो को लेकर अलग–अलग एफआईआर दर्ज की गई हैं और उनकी जांच जारी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अंकिता के माता–पिता के अनुरोध और भावनाओं का सम्मान करते हुए राज्य सरकार ने सीबीआई जांच की संस्तुति दी है।
कांग्रेस की नई मांग
सीबीआई जांच की संस्तुति के बाद कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कहा कि यह फैसला जनता और अंकिता के माता–पिता के संघर्ष का परिणाम है। उन्होंने मांग की कि सीबीआई जांच सुप्रीम कोर्ट या हाईकोर्ट के किसी न्यायाधीश की निगरानी में कराई जाए, ताकि निष्पक्षता पर कोई सवाल न उठे।
क्या था पूरा मामला?
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18 सितंबर 2022 को पौड़ी जिले के श्रीकोट डोभ गांव की रहने वाली 19 वर्षीय अंकिता भंडारी, जो वनंत्रा रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट थी, लापता हो गई।
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24 सितंबर 2022 को उसका शव चीला शक्ति नहर से बरामद हुआ।
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जांच में सामने आया कि रिजॉर्ट मालिक पुलकित आर्य ने अंकिता पर एक कथित वीआईपी को “अतिरिक्त सेवा” देने का दबाव बनाया था।
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एसआईटी जांच के बाद करीब 500 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की गई, 97 गवाह बनाए गए।
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30 मई 2025 को अदालत ने तीनों आरोपियों को दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
अब आगे क्या?
सीबीआई जांच की संस्तुति के बाद अब नजरें केंद्र सरकार के फैसले पर टिकी हैं। पीड़ित परिवार और आम जनता को उम्मीद है कि सीबीआई जांच के जरिए हत्याकांड से जुड़े हर पहलू, खासकर कथित वीआईपी की भूमिका, सामने आएगी और अंकिता को पूर्ण न्याय मिल सकेगा।
