‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ के तहत उत्तर-पूर्वी युवाओं से मुख्यमंत्री का संवाद, सुरक्षा और सांस्कृतिक एकता पर जोर

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‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ के तहत उत्तर-पूर्वी युवाओं से मुख्यमंत्री का संवाद, सुरक्षा और सांस्कृतिक एकता पर जोर

देहरादून, 1 अप्रैल। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से बुधवार को मुख्यमंत्री आवास में “एक भारत श्रेष्ठ भारत” अभियान के अंतर्गत उत्तर-पूर्वी राज्यों से आए युवाओं ने संवाद किया। तीन दिवसीय राज्य भ्रमण कार्यक्रम के तहत देहरादून से उत्तरकाशी की यात्रा पर आए इन छात्र-छात्राओं ने विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर मुख्यमंत्री से प्रश्न पूछे, जिनका उन्होंने आत्मीयता से उत्तर दिया।

संवाद के दौरान त्रिपुरा की एक छात्रा द्वारा छात्रों की सुरक्षा और सुविधाओं पर पूछे गए सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड में देश-विदेश से बड़ी संख्या में छात्र शिक्षा ग्रहण करने आते हैं और उनकी सुरक्षा राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने आश्वस्त किया कि सभी छात्र देवभूमि में पूरी तरह सुरक्षित हैं।

अरुणाचल प्रदेश के एक छात्र द्वारा सांस्कृतिक आदान-प्रदान को लेकर पूछे गए प्रश्न पर मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड और उत्तर-पूर्वी राज्यों की भौगोलिक और सांस्कृतिक समानताएं “एक भारत श्रेष्ठ भारत” की भावना को और मजबूत करती हैं।

महिला सशक्तिकरण पर चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य में 2.65 लाख से अधिक महिलाएं ‘लखपति दीदी’ बन चुकी हैं और महिला कल्याण के लिए 19 हजार करोड़ रुपये का जेंडर बजट निर्धारित किया गया है।

मुख्यमंत्री ने उत्तर-पूर्वी राज्यों को देश की “अष्टलक्ष्मी” बताते हुए कहा कि यहां से आए युवा अपने-अपने राज्यों की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के साथ उत्तराखंड को और समृद्ध बनाने का कार्य कर रहे हैं। उन्होंने भारत की “विविधता में एकता” को रेखांकित करते हुए कहा कि अलग-अलग वेशभूषा, भाषाएं और परंपराएं देश की ताकत हैं।

उन्होंने उत्तर-पूर्वी राज्यों की प्राकृतिक सुंदरता का उल्लेख करते हुए कहा कि अरुणाचल प्रदेश की हिमाच्छादित चोटियां, असम के चाय बागान, मणिपुर की लोकतक झील, मेघालय के पर्वत, मिजोरम की वादियां, नागालैंड की परंपराएं, सिक्किम की कंचनजंगा और त्रिपुरा की सांस्कृतिक विरासत भारत की विविधता को विशेष पहचान देती हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड और उत्तर-पूर्वी राज्य प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध हैं और दोनों क्षेत्रों में पहाड़, नदियां, जंगल और जनजातीय जीवनशैली का अनूठा संगम देखने को मिलता है। उन्होंने लोक संस्कृति की जीवंतता का उल्लेख करते हुए उत्तराखंड के पारंपरिक मेलों-त्योहारों और उत्तर-पूर्व के बिहू, शाद सुक माइनसिएम, चेरी ब्लॉसम फेस्टिवल और नोंगक्रेम जैसे उत्सवों को सांस्कृतिक समृद्धि का प्रतीक बताया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर-पूर्वी राज्यों में बीते वर्षों में इंफ्रास्ट्रक्चर, कनेक्टिविटी, पर्यटन और डिजिटल सशक्तिकरण के क्षेत्र में अभूतपूर्व विकास हुआ है। “Look East” नीति को “Act East” में बदलकर क्षेत्र को मुख्यधारा से जोड़ा गया है।

उन्होंने बताया कि उत्तर-पूर्व में हजारों किलोमीटर हाईवे, रेलवे लाइन, एयरपोर्ट, गैस ग्रिड और ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क का विस्तार हुआ है, साथ ही भारत-म्यांमार-थाईलैंड त्रिपक्षीय राजमार्ग जैसी परियोजनाएं अंतरराष्ट्रीय व्यापार को बढ़ावा दे रही हैं।

युवाओं को राष्ट्र निर्माण की शक्ति बताते हुए मुख्यमंत्री ने स्टार्टअप इंडिया, स्किल इंडिया, डिजिटल इंडिया और नई शिक्षा नीति जैसी योजनाओं का उल्लेख किया और युवाओं से आह्वान किया कि वे अपनी शिक्षा और कौशल का उपयोग अपने क्षेत्रों के विकास में करें।

मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से अपील की कि वे उत्तर-पूर्व से आए छात्रों के प्रति सम्मानजनक व्यवहार रखें और “अतिथि देवो भवः” की भावना को बनाए रखें। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार छात्रों की सुरक्षा के लिए हेल्पलाइन, सेंसिटाइजेशन प्रोग्राम और एंटी-रेसिज्म वर्कशॉप भी संचालित कर रही है।

कार्यक्रम में अजय कोठियाल सहित अन्य गणमान्य लोग भी उपस्थित रहे।


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