होमगार्ड स्थापना दिवस पर सीएम धामी की बड़ी सौगात, वर्दी-भोजन-प्रशिक्षण भत्ते में वृद्धि

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आज देहरादून के होमगार्ड मुख्यालय में उत्तराखंड होमगार्ड एवं नागरिक सुरक्षा विभाग के स्थापना दिवस के अवसर पर भव्य रैतिक परेड आयोजित की गई, जिसकी सलामी लेते हुए पुष्कर सिंह धामी (मुख्यमंत्री, उत्तराखंड) ने समारोह की अध्यक्षता की। इस मौके पर उन्होंने विभाग की स्मारिका-2025 और आगामी कैलेंडर-2026 का विमोचन भी किया।

होमगार्ड जवानों को पूर्व की सुविधाओं से कहीं बेहतर: सीएम धामी की घोषणाएं

मुख्यमंत्री धामी ने होमगार्ड जवानों के कल्याण के लिए कई बड़े फैसलों का ऐलान किया:

  • अब वर्दी भत्ता दिया जाएगा — पहले वर्दी मुख्यालय से वितरित होती थी।

  • भोजन भत्ते में 50% बढ़ोतरी — ड्यूटी के दौरान मिलने वाला भत्ता अब अधिक होगा।

  • प्रशिक्षण भत्ता ₹50 से बढ़ाकर ₹140 प्रतिदिन।

  • इसके अतिरिक्त, महिला होमगार्ड के लिए मातृत्व अवकाश, सालाना 12 आकस्मिक अवकाश, 9000 फीट से ऊँचाई पर तैनाती पर प्रोत्साहन राशि, तथा विशेष प्रशिक्षण प्राप्त होमगार्ड को अतिरिक्त भत्ता समेत अन्य सुधारात्मक प्रावधान किये गए।

इन घोषणाओं के पीछे यह उद्देश्य है कि होमगार्ड जवानों का सम्मान और सुविधा सुनिश्चित हो — जो कानून-व्यवस्था बनाए रखने, आपदा प्रबंधन, धार्मिक यात्राओं एवं पर्वतीय क्षेत्रों में जनता की सेवा करते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सरकार का संकल्प है कि होमगार्ड जवानों का कल्याण सुनिश्चित हो।

होमगार्ड: जिम्मेदारियाँ और समाज में भूमिका

Home Guard (India) एक स्वैच्छिक सुरक्षा बल है, जो पुलिस की सहायक-शक्ति के रूप में कार्य करती है। उनका दायित्व है:

  • कानून-व्यवस्था बनाए रखना,

  • भीड़-तादाद और कार्यक्रमों में व्यवस्था सुनिश्चित करना,

  • प्राकृतिक आपदाओं या अन्य आपात स्थितियों में राहत एवं बचाव,

  • सामाजिक सुरक्षा, नागरिक संरक्षण, फायर-सर्विस, प्रथम-चिकित्सा, जल/बिजली व्यवस्थाओं जैसी आवश्यक सेवाओं में मदद।

उत्तराखंड में भी होमगार्ड जवान, पर्वतीय-मार्गों, धार्मिक यात्राओं (जैसे चारधाम, कुम्भ, कांवड़) एवं आपदाओं के समय राज्य की अग्रिम पंक्ति में रहते हैं।

कम-भुगतान से सम्मान की ओर: राज्य सरकार की पहल

पिछले कई सालों से कई राज्यों में होमगार्ड जवानों के लिए वर्दी भत्ता, भत्ता आदि नियमित रूप से जारी था। लेकिन उत्तराखंड में, वर्दी मुख्यालय से दी जाती थी — जिससे कई दिक्कतें आती थीं। इस बार की घोषणाएं, न सिर्फ भत्तों में वृद्धि हैं, बल्कि यह राज्य सरकार द्वारा होमगार्ड को “सहयोगी-बल” की बजाय “सम्मानित-सेवक” के रूप में देखने की दिशा में लिया गया स्पष्ट कदम माना जा रहा है।

आज का कार्यक्रम — स्थापना दिवस + रैतिक परेड + स्मारिका-विमोचन + कल्याण घोषणाएं — यह दर्शाता है कि उत्तराखंड सरकार होमगार्ड जवानों की मेहनत और समर्पण को भत्ता व सुविधाओं के माध्यम से मान्यता देना चाहती है। यह न सिर्फ जवानों के लिए लाभदायक है, बल्कि राज्य की सुरक्षा-व्यवस्था और आपदा प्रबंधन को भी मजबूत करेगा।


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