‘उत्तराखंड साहित्य गौरव सम्मान-2025’ में डॉ. जितेन ठाकुर को साहित्य भूषण सम्मान

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‘उत्तराखंड साहित्य गौरव सम्मान-2025’ में डॉ. जितेन ठाकुर को साहित्य भूषण सम्मान

देहरादून, 1 अप्रैल। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्य सेवक सदन, मुख्यमंत्री आवास में आयोजित ‘उत्तराखंड साहित्य गौरव सम्मान समारोह-2025’ में प्रदेश के प्रतिष्ठित साहित्यकारों को सम्मानित किया। इस अवसर पर राज्य के सर्वोच्च साहित्यिक सम्मान “उत्तराखंड साहित्य भूषण सम्मान” से डॉ. जितेन ठाकुर को नवाजा गया।

समारोह में मुख्यमंत्री ने डॉ. बुद्धिनाथ मिश्र, श्याम सिंह कुटौला, डॉ. प्रीतम सिंह, केसर सिंह राय एवं अताए साबिर अफजल मंगलौरी को “उत्तराखंड दीर्घकालीन उत्कृष्ट साहित्य सृजन पुरस्कार” प्रदान किया। इसके अलावा विभिन्न विधाओं में उत्कृष्ट योगदान देने वाले साहित्यकारों और “युवा कलमकार प्रतियोगिता” के विजेताओं को भी सम्मानित किया गया।

“साहित्य नारी वंदन सम्मान” के तहत प्रो. दिवा भट्ट, उत्कृष्ट बाल साहित्य के लिए प्रो. दिनेश चमोला, “उत्तराखंड मौलिक रचना पुरस्कार” के अंतर्गत डॉ. भूपेंद्र बिष्ट, डॉ. सुधा जुगरान और शीशपाल गुसाईं को सम्मानित किया गया। वहीं कुमाऊनी और गढ़वाली साहित्य में उत्कृष्ट योगदान के लिए श्रीमती तारा पाठक, हेमंत सिंह बिष्ट और गजेंद्र नौटियाल को सम्मान मिला।

अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने कहा कि यह उनके लिए गर्व का विषय है कि उन्हें प्रदेश के महान साहित्यकारों को सम्मानित करने का अवसर मिला। उन्होंने कहा कि डॉ. जितेन ठाकुर न केवल उत्तराखंड बल्कि पूरे हिंदी साहित्य जगत के लिए प्रेरणा स्रोत हैं।

मुख्यमंत्री ने सभी सम्मानित साहित्यकारों को बधाई देते हुए कहा कि वे अपनी रचनात्मकता के माध्यम से राज्य की सांस्कृतिक विरासत को समृद्ध करने के साथ नई पीढ़ी तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह सम्मान समारोह प्रदेश की साहित्यिक परंपरा और रचनात्मक चेतना का प्रतीक है।

इस दौरान मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड की समृद्ध साहित्यिक परंपरा का उल्लेख करते हुए सुमित्रानंदन पंत, गौरा पंत शिवानी, मोहन उप्रेती और शैलेश मटियानी जैसे साहित्यकारों के योगदान को याद किया।

उन्होंने कहा कि साहित्य समाज का दर्पण होता है और लेखक समाज के मार्गदर्शक होते हैं। स्वतंत्रता आंदोलन और उत्तराखंड राज्य निर्माण में भी साहित्यकारों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि राज्य सरकार साहित्य और संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए प्रतिबद्ध है। सरकार द्वारा साहित्यकारों को सम्मानित करने के साथ-साथ ग्रंथ प्रकाशन के लिए अनुदान भी दिया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि उत्तराखंड को साहित्यिक पर्यटन के केंद्र के रूप में विकसित करने के उद्देश्य से राज्य में दो “साहित्य ग्राम” स्थापित किए जा रहे हैं, जहां साहित्यकारों को आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।

कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री ने साहित्यकारों से आह्वान किया कि वे अपनी रचनाओं के माध्यम से उत्तराखंड की सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान को देश-विदेश तक पहुंचाने में अपनी भूमिका निभाते रहें।


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