होमगार्ड वर्दी घोटाला: सीएम धामी ने डिप्टी कमांडेंट अमिताभ श्रीवास्तव को किया निलंबित, संयुक्त जांच समिति गठित
देहरादून।
उत्तराखंड में होमगार्ड्स एवं नागरिक सुरक्षा विभाग में वर्दी सामग्री की खरीद से जुड़े बड़े घोटाले पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सख्त रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री ने मामले में संलिप्त पाए जाने पर निदेशक होमगार्ड (डिप्टी कमांडेंट) अमिताभ श्रीवास्तव को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। साथ ही पूरे प्रकरण की जांच के लिए संयुक्त जांच समिति गठित करने के निर्देश दिए गए हैं।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने होमगार्ड्स एवं नागरिक सुरक्षा विभाग में वर्दी सामग्री खरीद से जुड़े घोटाले में संलिप्त पाए जाने पर निदेशक होमगार्ड (डिप्टी कमांडेंट) अमिताभ श्रीवास्तव को तत्काल प्रभाव से निलंबित करते हुए मामले की जांच के लिए संयुक्त जांच समिति गठित करने के निर्देश…
— Uttarakhand DIPR (@DIPR_UK) January 24, 2026
यह मामला वित्तीय वर्ष 2024–25 और 2025–26 के दौरान होमगार्ड्स के लिए की गई वर्दी सामग्री की खरीद प्रक्रिया से जुड़ा है। महानिदेशक, होमगार्ड्स एवं नागरिक सुरक्षा, देहरादून की ओर से शासन को भेजी गई रिपोर्ट में टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता के अभाव और नियमों के उल्लंघन की बात सामने आई थी। इसके आधार पर मुख्यमंत्री ने कार्रवाई के आदेश दिए।
सीएम धामी का सख्त संदेश:
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्पष्ट कहा कि राज्य सरकार भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस नीति पर काम कर रही है।
उन्होंने कहा—
“किसी भी स्तर पर अनियमितता या भ्रष्ट आचरण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। दोषी पाए जाने वाले अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाएगी।”
अफसरों-ठेकेदारों की मिलीभगत का आरोप
जांच में सामने आया कि अफसरों ने ठेकेदारों से मिलीभगत कर करीब एक करोड़ रुपये के सामान का बिल तीन करोड़ रुपये का बना दिया।
टेंडर में सामान की कीमतें बाजार भाव से करीब तीन गुना अधिक दिखाई गईं—
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₹130 का डंडा → ₹375
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₹500 के जूते → ₹1500
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₹1200 की पैंट-शर्ट → ₹3000
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₹500 की जैकेट → ₹1580
जब नए डीजी पी.वी.के. प्रसाद ने बाजार दरों से तुलना की तो बड़ा अंतर सामने आया। इसके बाद जांच टीम गठित की गई और टेंडर निरस्त कर दिया गया।
डीजी ने की सख्त संस्तुति
महानिदेशक ने आरोपी डिप्टी कमांडेंट अमिताभ श्रीवास्तव के खिलाफ—
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केस दर्ज कराने
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दो करोड़ रुपये की रिकवरी
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सेवा से बर्खास्त करने
की संस्तुति शासन को भेजी थी।
अब मुख्यमंत्री ने निलंबन के आदेश जारी कर पूरे मामले की संयुक्त जांच समिति से जांच कराने का फैसला लिया है।
