टिहरी झील को मिलेगा ग्लोबल पहचान का नया आयाम, मास्टर प्लान से बदलेगी देवभूमि की पर्यटन तस्वीर
देहरादून/ उत्तराखंड की शांत, भव्य और प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर टिहरी झील अब विश्व पर्यटन मानचित्र पर अपनी अलग पहचान बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है। मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने टिहरी झील को ग्लोबल टूरिस्ट डेस्टिनेशन के रूप में विकसित करने के लिए विस्तृत मास्टर प्लान तैयार करने और प्रभावी कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए हैं।

सोमवार को सचिवालय में आयोजित समीक्षा बैठक में मुख्य सचिव ने उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद को निर्देशित किया कि टिहरी झील और उसके आसपास के क्षेत्रों में पर्यटन विकास के लिए व्यापक और दीर्घकालिक दृष्टिकोण के साथ मास्टर प्लान तैयार किया जाए। यह योजना न केवल पर्यटन को बढ़ावा देगी बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार के नए अवसर भी पैदा करेगी।
प्राकृतिक सौंदर्य और रोमांच का अनूठा संगम

टिहरी गढ़वाल अपनी अद्भुत प्राकृतिक संरचना, शांत वातावरण और हिमालय की गोद में बसे होने के कारण वर्षों से पर्यटकों को आकर्षित करता रहा है। विशाल टिहरी बांध से निर्मित यह झील एशिया की सबसे बड़ी मानव निर्मित झीलों में से एक है, जिसकी विशाल जलराशि, पहाड़ों की हरियाली और नीले आसमान का संगम इसे एक स्वर्गीय दृश्य प्रदान करता है।

यहां पर्यटक न केवल प्रकृति का आनंद लेते हैं, बल्कि एडवेंचर गतिविधियों जैसे—
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जेट स्कीइंग
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कयाकिंग
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बोटिंग
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पैराग्लाइडिंग
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फ्लोटिंग हट्स में ठहरने का अनुभव
का भी रोमांच महसूस करते हैं। सूर्योदय और सूर्यास्त के समय झील का दृश्य विशेष रूप से मनमोहक होता है, जब सुनहरी रोशनी पानी की सतह पर चमकती है।
विश्वस्तरीय सुविधाओं से बदलेगा पर्यटन का स्वरूप

मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि टिहरी झील के चारों ओर प्रस्तावित रिंग रोड परियोजना को तेजी से पूरा किया जाए। रिंग रोड बनने से झील के विभिन्न हिस्सों तक पहुंच आसान होगी और पर्यटन सुविधाओं का विस्तार होगा।
इसके साथ ही—
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झील क्षेत्र में सी-प्लेन संचालन की योजना
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रिंग रोड पर कम से कम दो हेलीपैड का निर्माण
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आधुनिक पर्यटन अवसंरचना का विकास
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अनुभवी कंसल्टेंट की नियुक्ति
जैसे महत्वपूर्ण कदम उठाए जाएंगे।
उन्होंने सचिव वित्त, पर्यटन, नागरिक उड्डयन और संबंधित विभागों को समन्वय स्थापित कर योजनाओं को तेजी से लागू करने के निर्देश दिए।
टिहरी ही नहीं, पूरे क्षेत्र को मिलेगा लाभ

मुख्य सचिव ने ऋषिकेश के मुनि की रेती क्षेत्र और लोहाघाट, चम्पावत के पर्यटन विकास के प्रस्ताव भी शीघ्र तैयार करने के निर्देश दिए हैं, ताकि इन्हें समग्र मास्टर प्लान के साथ केंद्र सरकार को भेजा जा सके।
इससे उत्तराखंड के विभिन्न पर्यटन स्थलों को एकीकृत रूप से विकसित किया जा सकेगा और राज्य को अंतरराष्ट्रीय पर्यटन केंद्र के रूप में स्थापित करने में मदद मिलेगी।
स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार को मिलेगा बड़ा बढ़ावा

टिहरी झील को ग्लोबल डेस्टिनेशन बनाने की इस योजना से—
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स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे
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होटल, होमस्टे और एडवेंचर पर्यटन उद्योग को बढ़ावा मिलेगा
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स्थानीय हस्तशिल्प और संस्कृति को अंतरराष्ट्रीय मंच मिलेगा
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राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूत आधार मिलेगा
देवभूमि का नया पर्यटन अध्याय

टिहरी झील की प्राकृतिक सुंदरता, शांत वातावरण और रोमांचक पर्यटन संभावनाएं इसे विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी पर्यटन स्थल बनने की क्षमता देती हैं। यदि प्रस्तावित मास्टर प्लान प्रभावी ढंग से लागू होता है, तो आने वाले वर्षों में टिहरी झील न केवल उत्तराखंड बल्कि पूरे भारत का प्रमुख ग्लोबल टूरिज्म हब बन सकती है।
यह पहल उत्तराखंड को “देवभूमि” के साथ-साथ “विश्व पर्यटन की नई राजधानी” के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम साबित हो सकती है।
