चमोली में महापंचायत का ऐतिहासिक फैसला — नंदा देवी की ‘ठुलि जात’ इसी साल होगी आयोजित
चमोली। उत्तराखंड की लोक संस्कृति और आस्था का प्रतीक विश्व प्रसिद्ध हिमालयी कुंभ — मां नंदा देवी की बड़ी जात (ठुलि जात) इसी वर्ष आयोजित की जाएगी। नंदाजात 2026 को लेकर चल रहे विवाद के बीच नंदानगर ब्लॉक सभागार में आयोजित महापंचायत में यह ऐतिहासिक निर्णय लिया गया। पंचायत ने स्पष्ट किया कि सदियों पुरानी परंपरा के अनुसार नंदा देवी की बड़ी जात का आयोजन इसी साल अगस्त–सितंबर माह में किया जाएगा।

महापंचायत में तय किया गया कि इस महायात्रा के शुभ प्रस्थान का मुहूर्त आगामी बसंत पंचमी के दिन गौड़ ब्राह्मणों द्वारा पंचांग गणना के आधार पर निकाला जाएगा। यात्रा की विधिवत शुरुआत सिद्धपीठ नंदा देवी मंदिर कुरुड़ से होगी।
महापंचायत ने उन फैसलों को खारिज कर दिया जिनमें नंदा देवी बड़ी जात को न कराने की बात कही गई थी। पंचायत ने इसे एक एनजीओ का व्यक्तिगत निर्णय बताते हुए अस्वीकार किया और स्पष्ट किया कि यात्रा का आयोजन पारंपरिक समयानुसार ही होगा। पंचायत ने यात्रा के स्थगन को लेकर चल रही तमाम अटकलों पर विराम लगाते हुए कहा कि ग्रामीण, जनप्रतिनिधि और मंदिर समितियां परंपरा को पूरी श्रद्धा और आस्था के साथ निभाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि नंदा देवी की बड़ी जात केवल धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान, लोक आस्था और परंपराओं का प्रतीक है, जिसे उसकी मूल भावना के अनुरूप ही संपन्न किया जाना चाहिए।
महापंचायत में बड़ी जात के संचालन के लिए एक समिति का गठन भी किया गया। इसमें सेवानिवृत्त कर्नल हरेंद्र सिंह रावत को अध्यक्ष और नंदा देवी के पुजारी अशोक गौड़ को सचिव बनाया गया है। हक-हकूकधारी सुखवीर रौतेला व नरेश गौड़ को उपाध्यक्ष तथा प्रकाश गौड़ को कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
संरक्षक मंडल में जिला पंचायत अध्यक्ष दौलत सिंह बिष्ट सहित नंदानगर, देवाल, थराली, नारायणबगड़, कर्णप्रयाग, जोशीमठ, दशोली और बड़ी जात में सम्मिलित होने वाली सभी देव डोलियों के अध्यक्षों को शामिल किया गया है।
गौरतलब है कि 18 जनवरी को श्री नंदा राजजात समिति नौटी द्वारा नंदा राजजात 2026 को स्थगित करने के फैसले के बाद विवाद उत्पन्न हुआ था, जिसके चलते महापंचायत बुलाई गई। पंचायत का स्पष्ट संदेश है— नंदा देवी की बड़ी जात होकर रहेगी।
इस महापंचायत में क्षेत्र के जनप्रतिनिधि, सामाजिक संगठन, मंदिर समिति के पदाधिकारी, बुद्धिजीवी, महिला मंगल दल और बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण मौजूद रहे।
