देहरादून/ उत्तराखंड सरकार ने Employee State Insurance (ESI) से जुड़े संभावित ₹300 करोड़ के घोटाले की जांच शुरू कर दी है। इसी कड़ी में राज्य में संचालित 16 निजी हॉस्पिटल्स और पैथोलॉजी लैब्स को एक हफ्ते के भीतर जवाब देने के लिए नोटिस जारी किया गया है। ये नोटिस सचिव सी. रविशंकर की अध्यक्षता में गठित जांच समिति की प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर भेजे गए हैं।
क्या है पूरा मामला?
ESI स्कीम के तहत पंजीकृत कर्मचारियों को मुफ्त इलाज की सुविधा दी जाती है, जिसका खर्च सरकार वहन करती है। वित्तीय वर्ष 2023-24 में ESI से जुड़े अस्पतालों को लगभग ₹300 करोड़ का भुगतान किया गया। इस भारी-भरकम खर्च पर सरकार को शक हुआ और इसी के बाद एक उच्चस्तरीय जांच समिति का गठन किया गया।
शुरुआती जांच में सामने आईं गड़बड़ियां
जांच समिति ने preliminary जांच के दौरान कुछ संदिग्ध भुगतान और प्रक्रियागत अनियमितताओं की पुष्टि की है। इसके बाद इन 16 संस्थानों को कारण बताओ नोटिस भेजा गया है। जवाब मिलने के बाद दस्तावेजों की गहन जांच की जाएगी और अंतिम रिपोर्ट तैयार कर शासन को सौंपी जाएगी।
रेफरल प्रणाली में बदलाव बना शक का आधार
ESI हॉस्पिटल्स को रेफर करने की प्रक्रिया में हाल ही में बदलाव किया गया था, जिसके बाद रेफर किए गए मामलों में अचानक गिरावट आई। इसी अवधि में कुछ निजी अस्पतालों में beneficiaries की संख्या बढ़ी, जिससे इस घोटाले की आशंका और गहराई।
बायोमैट्रिक अटेंडेंस सिस्टम की तैयारी
भविष्य में ऐसे घोटालों पर रोक लगाने के लिए सरकार अब ESI beneficiaries के लिए बायोमैट्रिक अटेंडेंस सिस्टम लागू करने की योजना बना रही है। इससे मरीजों की उपस्थिति का रिकॉर्ड डिजिटल रूप से सुरक्षित रहेगा और धोखाधड़ी की गुंजाइश कम होगी।
जांच का अगला चरण
जांच समिति के अध्यक्ष सी. रविशंकर के अनुसार, कुछ भुगतान “गंभीर संदेह” के दायरे में हैं। संबंधित अस्पतालों से जवाब मिलने के बाद अंतिम रिपोर्ट तैयार की जाएगी, जिसे जल्द ही शासन को सौंपा जाएगा। अगर गड़बड़ियों की पुष्टि होती है, तो कड़ी कार्रवाई तय मानी जा रही है।