केंद्रीय बजट 2026-27 में उत्तराखंड को बड़ी सौगात: बनेंगे इकोलॉजिकल सस्टेनेबल माउंटेन ट्रेल्स

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केंद्रीय बजट 2026-27 में उत्तराखंड को बड़ी सौगात: बनेंगे इकोलॉजिकल सस्टेनेबल माउंटेन ट्रेल्स

देहरादून, 1 फ़रवरी 2026 — केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज संसद में केंद्रीय बजट 2026-27 पेश किया, जिसमें ट्रेकिंग, हाइकिंग और इकोलॉजिकल सस्टेनेबल माउंटेन ट्रेल जैसी पहाड़ पर आधारित सस्टेनेबल पर्यटन पहलों को विशेष रूप से स्थान दिया गया है। यह कदम उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य के लिए अवसरों और चुनौतियों दोनों के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

ट्रेल्स को बजट में स्थान — क्या कहा गया?

केंद्रीय बजट में किया गया महत्वपूर्ण ऐलान यह है कि हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू एवं कश्मीर सहित कुछ और पहाड़ी/पहाड़ी-प्रकार के क्षेत्रों में इकोलॉजिकल सस्टेनेबल माउंटेन ट्रेल (Ecologically Sustainable Mountain Trails) विकसित किए जाएँगे। इन ट्रेल्स का उद्देश्य पारिस्थितिकी पर न्यूनतम प्रभाव डालते हुए देश को विश्व-स्तरीय ट्रेकिंग और हाइकिंग अनुभव प्रदान करना है।

यह पहल पर्यावरण के संरक्षण और पर्यटन के बीच संतुलन स्थापित करने की दृष्टि से तैयार की गई है। वित्त मंत्री ने बताया कि भारत के पहाड़ों में ऊँची जैव विविधता और प्राकृतिक सौंदर्य को ध्यान में रखते हुए यह योजनाएँ विकसित की जाएँगी, जिससे स्थानीय समुदाय और अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिले।

उत्तराखंड के लिए इस पहल का महत्व

उत्तराखंड, जो पहले से ही प्राकृतिक सौंदर्य, विश्व-प्रसिद्ध ट्रेकिंग रूट और साहसिक पर्यटन की संभावनाओं के लिए जाना जाता है, इस नई पहल से सीधे लाभान्वित होने की उम्मीद रखता है। राज्य में पहले से लोकप्रिय ट्रेकिंग मार्ग — जैसे हर की दून, रूपिन पास, फूलों की घाटी, गंगोत्री-गोमुख, पिंडारी, कफनी और नंदा देवी बेस कैंप — हैं, जिन्हें अब और अधिक संरचित, सुरक्षित और पर्यावरण-अनुकूल तरीके से विकसित किया जा सकता है।

इकोलॉजिकल ट्रेल्स से जुड़े प्रमुख सकारात्मक प्रभावों में शामिल हैं:
पर्यावरण संरक्षण — प्राकृतिक संसाधनों, वनस्पति और जैव विविधता पर प्रभाव कम किया जाएगा।
स्थानीय रोजगार में वृद्धि — गाइड्स, पोर्टर्स, होम-स्टे संचालक और अन्य पर्यटन सेवा प्रदाताओं के लिए रोजगार सृजन की संभावनाएँ बढ़ेंगी।
युवाओं को अवसर — बजट में पर्यटन सेक्टर की भूमिका को देखते हुए स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और कौशल विकास के नए मार्ग खुलेंगे।

स्थानीय समुदाय और आर्थिक प्रभाव

उत्तराखंड में पहले से ही ट्रेकिंग से जुड़े लाखों पर्यटक आते हैं। आंकड़ों के अनुसार, राज्य में हर साल 3 से 5 लाख पर्यटक केवल हाइकिंग और ट्रेकिंग के लिए आते हैं, जिसमें देशी और विदेशी दोनों पर्यटक शामिल हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ये ट्रेल्स योजनाबद्ध ढंग से विकसित किए गए तो इस संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है, जिससे राज्य की पर्यटन आय दोगुनी तक पहुंच सकती है।

आगे चलकर इससे पहाड़ी जिलों में स्थायी रोजगार के अवसर, पलायन में कमी और स्थानीय अर्थव्यवस्था में मजबूती देखी जा सकती है। पर्यटन से जुड़ी सेवाओं जैसे होम-स्टे, खाद्य और फ़र्नीचर-आधारित हस्तकला, गाइडिंग और मेडिकल-हेल्थ-टूरिज्म से जुड़े कामों में भी विस्तार की संभावनाएँ हैं।

चुनौतियाँ और आगे क्या?

हालाँकि केंद्रीय बजट ने इकोलॉजिकल ट्रेल्स की दिशा में एक स्पष्ट नीति-ढांचा दिया है, लेकिन इसका सफल क्रियान्वयन—विशेष रूप से उत्तराखंड जैसे संवेदनशील पारिस्थितिक क्षेत्रों में—काफी चुनौतिपूर्ण होगा। इसके लिए जरूरी होगा कि:

  • स्थानीय समुदाय को योजना-अधिकारियों के साथ जोड़कर निर्णय-प्रक्रिया में शामिल किया जाए।

  • गाइड्स और ट्रैकर्स के लिए सुरक्षित, पर्यावरण-अनुकूल प्रशिक्षण और संसाधन उपलब्ध कराए जाएँ।

  • साफ-सुथरे कचरा प्रबंधन, सीमित पर्यटक संख्या और जैव विविधता संरक्षण के नियम सख्ती से लागू किए जाएँ।

कुल मिलाकर, केंद्रीय बजट 2026-27 में ट्रेकिंग, हाइकिंग और इको-फ्रेंडली माउंटेन ट्रेल्स को शामिल करना उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्यों के लिए एक बड़ा अवसर साबित हो सकता है। अगर यह पहल सही नीति, स्थानीय सहभागिता और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ लागू होती है, तो उत्तराखंड भारत का विश्व-स्तरीय पर्यावरण-अनुकूल साहसिक पर्यटन हब बन सकता है।


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