देहरादून में ‘नारी शक्ति वंदन सम्मेलन’, सीएम धामी बोले—महिला आरक्षण नया युग की शुरुआत
देहरादून, 16 अप्रैल।
Nari Shakti Vandan Adhiniyam पर संसद के प्रस्तावित विशेष सत्र से पहले देशभर में चर्चाओं का दौर तेज है। इसी क्रम में उत्तराखंड राज्य महिला आयोग द्वारा राजकीय दून मेडिकल कॉलेज ऑडिटोरियम में ‘नारी शक्ति वंदन सम्मेलन’ का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री Pushkar Singh Dhami ने कहा कि प्रधानमंत्री Narendra Modi के नेतृत्व में वर्ष 2023 में पारित यह अधिनियम देश की मातृशक्ति के सम्मान, अधिकार और सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक और युगांतकारी कदम है।
33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान
मुख्यमंत्री ने बताया कि इस अधिनियम के तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया है। उन्होंने कहा कि यह केवल प्रतिनिधित्व बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि नीति-निर्माण में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने का एक क्रांतिकारी प्रयास है।
‘नारी शक्ति के बिना राष्ट्र की उन्नति संभव नहीं’
सीएम धामी ने कहा कि भारतीय संस्कृति में नारी शक्ति को सृजन और सामर्थ्य का आधार माना गया है। “शास्त्रों में भी कहा गया है कि शक्ति के बिना शिव भी अधूरे हैं। इसी प्रकार नारी के योगदान के बिना समाज और राष्ट्र की वास्तविक प्रगति की कल्पना नहीं की जा सकती,” उन्होंने कहा।
उन्होंने कहा कि आज की महिला हर क्षेत्र में अपनी भूमिका निभा रही है—वह किसान भी है, उद्यमी भी, पंचायत की जनप्रतिनिधि भी और संसद में नीति निर्धारण करने वाली सशक्त नेतृत्वकर्ता भी।
केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं का उल्लेख
मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार की योजनाओं—बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ, सुकन्या समृद्धि योजना, उज्ज्वला योजना, जन-धन योजना, मातृत्व वंदना योजना और स्वच्छ भारत मिशन—का जिक्र करते हुए कहा कि इन पहलों ने महिलाओं के जीवन स्तर में व्यापक सुधार किया है।
साथ ही, राज्य सरकार द्वारा संचालित उत्तराखंड राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन, सशक्त बहना उत्सव योजना और महिला स्वयं सहायता समूह सशक्तिकरण योजना के जरिए महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री उद्यमशाला योजना के तहत महिला समूहों द्वारा बनाए गए उत्पादों को ब्रांड के रूप में विकसित करने पर भी जोर दिया जा रहा है।
विशेष सत्र से बढ़ी उम्मीदें
मुख्यमंत्री ने कहा कि 16 अप्रैल से संसद में प्रस्तावित विशेष सत्र के साथ ही दशकों से लंबित महिला आरक्षण का सपना अब साकार होने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
