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उत्तराखंड में चुनाव से पहले सियासी हलचल तेज, रामशरण नौटियाल कांग्रेस में; यशपाल बेनाम के इस्तीफे से बढ़ी चर्चाएं

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उत्तराखंड में चुनाव से पहले सियासी हलचल तेज, रामशरण नौटियाल कांग्रेस में; यशपाल बेनाम के इस्तीफे से बढ़ी चर्चाएं

देहरादून। उत्तराखंड में 2027 के विधानसभा चुनाव की आहट के साथ ही सियासी समीकरण बदलने लगे हैं। भाजपा से नेताओं की दूरी और कांग्रेस की ओर बढ़ते कदमों ने प्रदेश की राजनीति में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष रामशरण नौटियाल का कांग्रेस में शामिल होना और पौड़ी के पूर्व विधायक यशपाल बेनाम का भाजपा की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देना इसी बदलते राजनीतिक घटनाक्रम की दो अहम कड़ियां हैं। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि बेनाम अपनी अगली राजनीतिक पारी किस दल के साथ शुरू करते हैं।

रामशरण नौटियाल ने 19 अक्टूबर को नई दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। वह पहले कांग्रेस में रह चुके हैं और करीब 12 साल पहले भाजपा में शामिल हुए थे। पिछले विधानसभा चुनाव में उन्होंने चकराता सीट से भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ा था, लेकिन उन्हें जीत नहीं मिली। अब उनकी कांग्रेस में वापसी को चकराता क्षेत्र में पार्टी के संगठनात्मक समीकरणों से जोड़कर देखा जा रहा है।

वहीं, पौड़ी की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय यशपाल बेनाम ने 18 अक्टूबर को भाजपा की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। करीब आठ वर्षों तक भाजपा में रहे बेनाम ने फिलहाल अपने अगले राजनीतिक कदम को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है। हालांकि, उनके कांग्रेस में जाने की संभावनाओं को लेकर चर्चाएं जरूर तेज हैं, लेकिन जब तक उनकी ओर से कोई स्पष्ट बयान नहीं आता, इसे अटकलों के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।

कांग्रेस ने जताई नेताओं के आने की उम्मीद

रामशरण नौटियाल के कांग्रेस में शामिल होने पर पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने इसे पार्टी के लिए सकारात्मक घटनाक्रम बताया। उन्होंने कहा कि नौटियाल के भाजपा छोड़ने के बाद उनके कांग्रेस में आने की संभावना थी। प्रीतम सिंह के मुताबिक, यदि यशपाल बेनाम भी कांग्रेस में आते हैं तो इससे पौड़ी क्षेत्र में पार्टी को मजबूती मिल सकती है। उन्होंने यह भी दावा किया कि अन्य नेता भी कांग्रेस के संपर्क में हैं और आने वाले समय में पार्टी में शामिल हो सकते हैं।

भाजपा ने दलबदल को बताया महत्वाकांक्षा की राजनीति

दूसरी ओर, कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल ने नेताओं के दल बदलने की घटनाओं को चुनावी राजनीति और टिकट की संभावनाओं से जोड़कर देखा। उनका कहना है कि चुनाव नजदीक आने पर कुछ नेता अपनी राजनीतिक संभावनाओं को ध्यान में रखकर दल बदलते हैं। उन्होंने पिछले लोकसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस नेताओं के भाजपा में आने का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे नेताओं ने भाजपा में अपने लिए राजनीतिक जगह बनाने की कोशिश की होगी। उनियाल के अनुसार, जब नेताओं की अपेक्षाएं पूरी नहीं होतीं, तो वे दूसरे राजनीतिक विकल्प तलाशने लगते हैं।

2027 से पहले दलों के भीतर क्या चल रहा है?

उत्तराखंड में फिलहाल दो अलग-अलग घटनाक्रम सामने आए हैं—एक ओर रामशरण नौटियाल ने भाजपा छोड़कर कांग्रेस का हाथ थामा है, तो दूसरी ओर यशपाल बेनाम ने भाजपा से इस्तीफा देकर अपने अगले कदम को लेकर सस्पेंस बनाए रखा है। कांग्रेस इसे अपने संगठन के विस्तार की संभावना के रूप में देख रही है, जबकि भाजपा की ओर से दलबदल को नेताओं की व्यक्तिगत राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं से जोड़कर पेश किया जा रहा है।

हालांकि, इन घटनाओं से प्रदेश के चुनावी नतीजों पर क्या असर पड़ेगा, यह अभी कहना जल्दबाजी होगी। इतना जरूर है कि 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले नेताओं की आवाजाही, टिकट की दावेदारी और संगठन के भीतर असंतोष जैसे मुद्दे उत्तराखंड की सियासत में चर्चा के केंद्र में आ सकते हैं। आने वाले दिनों में यशपाल बेनाम के फैसले और दूसरे नेताओं के रुख से इस राजनीतिक हलचल की दिशा और स्पष्ट होगी।


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