प्रमाणपत्र फर्जीवाड़े में प्रशासन की पहली बड़ी कार्रवाई, दो लेखपाल निलंबित
देहरादून: प्रमाणपत्रों से जुड़े फर्जीवाड़े की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, प्रशासनिक स्तर पर जिम्मेदारी भी तय की जा रही है। मामले में प्रथम दृष्टया सत्यापन प्रक्रिया में लापरवाही सामने आने के बाद तहसील सदर के दो लेखपालों को निलंबित कर दिया गया है।
जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान के निर्देश पर लेखपाल जगदीश राठौर और महिला लेखपाल डिंपल के खिलाफ यह कार्रवाई की गई है। दोनों पर प्रमाणपत्रों के लिए प्राप्त आवेदनों और दस्तावेजों के सत्यापन में लापरवाही बरतने का आरोप है। बताया जा रहा है कि छात्राओं के प्रमाणपत्रों के दस्तावेज सत्यापन की जिम्मेदारी इन्हीं लेखपालों की थी।
मामला सामने आने के बाद पुलिस ने दो अलग-अलग थानों में प्राथमिकी दर्ज की थी। प्रकरण में अब तक दो आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इनमें एक छात्रा का पिता और दूसरा मेरठ का कथित दलाल रूपेश पंडित बताया गया है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी ने प्रशासनिक स्तर पर मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) के नेतृत्व में संयुक्त जांच समिति गठित की थी। समिति प्रमाणपत्र जारी करने की पूरी प्रक्रिया में हुई लापरवाही और अन्य अनियमितताओं की जांच कर रही है।
जांच के दौरान प्रथम दृष्टया सत्यापन में लापरवाही सामने आने पर प्रशासन ने दोनों लेखपालों को निलंबित किया है। अधिकारियों के मुताबिक जांच का दायरा आगे और बढ़ सकता है तथा अन्य कर्मचारियों की भूमिका भी सामने आने पर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने कहा कि मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है। प्रथम दृष्टया जिस भी कर्मचारी या अधिकारी की लापरवाही सामने आएगी, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। प्रमाणपत्रों से जुड़े दस्तावेजों की बारीकी से जांच की जा रही है और जांच के दायरे में आने वाले सभी मामलों को गंभीरता से लिया जा रहा है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि छात्रों के अधिकारों के साथ किसी भी तरह की धोखाधड़ी या जालसाजी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
