बागेश्वर: किश्तवाड़ में शहीद हुए हवलदार गजेंद्र सिंह गढ़िया पंचतत्व में विलीन, पूरे जनपद में शोक और गर्व का माहौल

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बागेश्वर: किश्तवाड़ में शहीद हुए हवलदार गजेंद्र सिंह गढ़िया पंचतत्व में विलीन, पूरे जनपद में शोक और गर्व का माहौल

बागेश्वर। जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ में आतंकियों से मुठभेड़ के दौरान वीरगति को प्राप्त हुए स्पेशल फोर्सेज के जांबाज हवलदार गजेंद्र सिंह गढ़िया को आज उनके पैतृक जनपद बागेश्वर में पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। शहीद का पार्थिव शरीर विशेष सैन्य हेलीकॉप्टर से कपकोट लाया गया, जहां पीजी कॉलेज ग्राउंड में हजारों लोगों ने नम आंखों से अपने वीर सपूत को श्रद्धांजलि अर्पित की।

जैसे ही हेलीकॉप्टर ग्राउंड पर उतरा, ‘भारत माता की जय’ और ‘गजेंद्र सिंह अमर रहें’ के नारों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा। स्थानीय प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और आम जनता ने पुष्पचक्र अर्पित कर शहीद को भावभीनी श्रद्धांजलि दी। इसके बाद शहीद का अंतिम संस्कार सरयू और खीरगंगा के पवित्र संगम पर पूरे सैन्य सम्मान के साथ किया गया।

सेना की 19 सिख रेजिमेंट की टुकड़ी ने शहीद को ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ दिया और हवा में गोलियां दागकर अपने वीर साथी को अंतिम सलामी दी। सैन्य अधिकारियों ने कहा कि राष्ट्र की रक्षा में हवलदार गजेंद्र सिंह का सर्वोच्च बलिदान देश कभी नहीं भूलेगा।

बीथी गांव निवासी शहीद के अंतिम सफर में उनके पिता धन सिंह, माता चंद्रा देवी और पत्नी लीला देवी का रो-रोकर बुरा हाल था। परिवार के चेहरे पर बेटे को खोने का गहरा दुख था, लेकिन उसकी वीरता पर पूरे गांव को गर्व भी महसूस हो रहा था। शहीद के सम्मान में पूरे जनपद में व्यावसायिक गतिविधियां बंद रहीं।

ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने कहा कि शहीद गजेंद्र सिंह गढ़िया ने देवभूमि की सैन्य परंपरा को आगे बढ़ाया है। उनका यह बलिदान आने वाली पीढ़ियों के लिए देशसेवा की एक अमिट प्रेरणा बना रहेगा।

डिस्क्लेमर: यह समाचार सार्वजनिक रूप से उपलब्ध और सत्यापित जानकारियों के आधार


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