उत्तराखंड में मदरसा बोर्ड 30 जून 2026 से होगा समाप्त, अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का गठन
देहरादून।
धामी सरकार ने अल्पसंख्यक शिक्षा विधेयक–2025 को लागू करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का गठन कर दिया है। इसके साथ ही प्रदेश में संचालित मदरसों को एक ही अंब्रेला के तहत लाने की प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू हो गई है। सरकार के फैसले के अनुसार उत्तराखंड मदरसा बोर्ड 30 जून 2026 से समाप्त हो जाएगा और 1 जुलाई 2026 से नया सिस्टम लागू होगा।
सरकार द्वारा पारित अल्पसंख्यक शिक्षा विधेयक–2025 को अगस्त 2025 में विधानसभा से मंजूरी मिली थी और 6 अक्टूबर 2025 को राजभवन से स्वीकृति के बाद यह कानून बन गया था। अब इसके क्रियान्वयन के लिए अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का गठन कर दिया गया है।
कौन होंगे प्राधिकरण में?
अध्यक्ष: प्रो. सुरजीत सिंह गांधी (सेवानिवृत्त), बीएसएम पीजी कॉलेज, रुड़की
सदस्य:
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डॉ. राकेश कुमार जैन (हरिद्वार)
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डॉ. सैय्यद अली हमीद (अल्मोड़ा)
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प्रो. पेमा तेनजिन (चमोली)
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प्रो. गुरमीत सिंह (मुरादाबाद)
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डॉ. एल्बा मन्ड्रेले (बागेश्वर)
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प्रो. रोबिना अमन (अल्मोड़ा)
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चंद्रशेखर भट्ट (पूर्व सचिव)
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राजेंद्र सिंह बिष्ट (पिथौरागढ़)
पदेन सदस्य:
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महानिदेशक, विद्यालयी शिक्षा
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निदेशक, राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद
पदेन सदस्य सचिव:
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निदेशक, अल्पसंख्यक कल्याण, उत्तराखंड
1 जुलाई 2026 से क्या बदलेगा?
मदरसा बोर्ड पूरी तरह समाप्त
सभी मदरसों को उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण से मान्यता और
उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा बोर्ड से संबद्धता लेनी होगी
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और राष्ट्रीय पाठ्यक्रम ढांचा लागू होगा
सीएम धामी का बयान
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि यह विधेयक शिक्षा में सुधार और अल्पसंख्यक समुदाय के बच्चों को मुख्यधारा से जोड़ने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा,
“हम चाहते हैं कि अल्पसंख्यक समाज के बच्चे भी आधुनिक और संस्कारयुक्त शिक्षा लेकर राष्ट्र निर्माण में योगदान दें। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संकल्प है कि सबको शिक्षा का अधिकार मिले।”
अल्पसंख्यक आयोग की प्रतिक्रिया
उत्तराखंड अल्पसंख्यक आयोग की उपाध्यक्ष फरजाना बेगम ने कहा कि इस फैसले से अल्पसंख्यक बच्चों का भविष्य उज्ज्वल होगा।
“अब बच्चे डॉक्टर, डीएम, एसएसपी जैसे पदों तक पहुंच सकेंगे। यह फैसला उनके लिए एक नई दिशा खोलेगा।”
उत्तराखंड देश का पहला राज्य बन गया है, जहां मदरसा बोर्ड को समाप्त कर अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ा जा रहा है। यह कदम राज्य में शिक्षा सुधार की दिशा में ऐतिहासिक माना जा रहा है।
