रोहिणी में ‘उत्तराखण्ड महोत्सव सीजन–02’: सीएम धामी ने लोक संस्कृति को बताया पहचान की धरोहर
नई दिल्ली/देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दिल्ली के रोहिणी में ‘हम सबका उत्तराखण्ड’ संस्था द्वारा आयोजित ‘उत्तराखण्ड महोत्सव रोहिणी सीजन–02’ में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में प्रवासी उत्तराखण्डी, लोक कलाकार, युवा एवं महिलाएं उपस्थित रहीं। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम स्थल पर लोक कलाकारों का उत्साहवर्धन करते हुए उत्तराखण्ड की संस्कृति, परंपराओं और लोक विरासत को समर्पित इस आयोजन की सराहना की।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने ‘उत्तराखण्ड के सितारे’ सम्मान से सुप्रसिद्ध सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर सौरभ जोशी, हल्द्वानी मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य एवं वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. मनोज गोरखेला तथा लोक गायिका कल्पना चौहान को सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के आयोजनों से लोक कलाकारों को मंच और सम्मान मिलता है, साथ ही समाज में सेवा और संस्कारों की भावना भी मजबूत होती है।
संस्कृति से जुड़ी पीढ़ियाँ बनती हैं मजबूत
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि उत्तराखण्ड की लोक संस्कृति आज भी अपने गीतों, वेशभूषा और परंपराओं के माध्यम से जीवंत है। देश-विदेश में रहने वाले उत्तराखण्डी अपनी सांस्कृतिक जड़ों से गहराई से जुड़े हुए हैं। पारंपरिक गीत-संगीत और वेशभूषा राज्य की समृद्ध पहचान को दुनिया के सामने स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन आने वाली पीढ़ियों के लिए विशेष महत्व रखते हैं, क्योंकि इससे बच्चों और युवाओं में अपनी बोली, संस्कृति और परंपराओं के प्रति गर्व की भावना विकसित होती है।
देवभूमि की वैश्विक पहचान
मुख्यमंत्री ने देवभूमि उत्तराखण्ड को आस्था, तप, त्याग और साधना की भूमि बताते हुए कहा कि बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगा-यमुना और आदि कैलाश जैसे पवित्र स्थलों के कारण राज्य की विश्वभर में विशेष पहचान है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “विकास भी और विरासत भी” के मंत्र के अनुरूप राज्य में धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यटन स्थलों का पुनर्विकास किया जा रहा है। केदारनाथ और बदरीनाथ धाम के पुनर्निर्माण से आस्था को मजबूती मिली है और पर्यटन व स्थानीय रोजगार को भी नया आयाम मिला है।
पर्यटन, रोजगार और महिला सशक्तिकरण पर फोकस
मुख्यमंत्री ने बताया कि उत्तराखण्ड आज वेडिंग डेस्टिनेशन, एडवेंचर टूरिज्म और फिल्म शूटिंग का प्रमुख केंद्र बनकर उभर रहा है। विंटर टूरिज्म, ‘वेड इन उत्तराखण्ड’ और होम-स्टे जैसी पहलों से स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है। कृषि, दुग्ध और मधु उत्पादन तथा स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देकर ग्रामीण आजीविका को सशक्त किया जा रहा है।
उन्होंने महिला सशक्तिकरण पर बल देते हुए कहा कि लखपति दीदी योजना से बड़ी संख्या में महिलाएं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनी हैं। ‘एक जनपद-दो उत्पाद’ योजना और ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ ब्रांड से राज्य के उत्पादों को वैश्विक पहचान मिल रही है।
सुशासन और विकास की नई दिशा
मुख्यमंत्री ने कहा कि सीमित संसाधनों और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद उत्तराखण्ड ने अर्थव्यवस्था, प्रति व्यक्ति आय, बजट, बिजली उत्पादन और स्वास्थ्य सुविधाओं में उल्लेखनीय प्रगति की है। पलायन रोकने, किसानों की आय बढ़ाने और युवाओं को रोजगार देने में राज्य को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है।
उन्होंने कहा कि सख्त कानूनों, पारदर्शी शासन और समान नागरिक संहिता के प्रभावी क्रियान्वयन से राज्य में सुशासन स्थापित हुआ है। प्रधानमंत्री द्वारा बताए गए “उत्तराखण्ड का दशक” को साकार करने के लिए सरकार निरंतर प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।
