उत्तराखंड की 108 आपातकालीन सेवा बनी जीवनरक्षक मॉडल, पाँच वर्षों में लाखों जिंदगियों को मिला संबल

Our News, Your Views

उत्तराखंड की 108 आपातकालीन सेवा बनी जीवनरक्षक मॉडल, पाँच वर्षों में लाखों जिंदगियों को मिला संबल

देहरादून।
उत्तराखंड सरकार के लिए नागरिकों का जीवन, स्वास्थ्य और सुरक्षा सदैव सर्वोच्च प्राथमिकता रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दूरदर्शी नेतृत्व और स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत के सतत मार्गदर्शन में राज्य की 108 आपातकालीन सेवा ने बीते पाँच वर्षों (2020-21 से 2024-25) के दौरान आपात स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक सशक्त, भरोसेमंद और प्रभावी प्रणाली के रूप में अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित की है।

पर्वतीय, दुर्गम और मौसम की दृष्टि से चुनौतीपूर्ण भौगोलिक परिस्थितियों वाले उत्तराखंड जैसे राज्य में त्वरित चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है। इसके बावजूद 108 सेवा ने प्रशासनिक प्रतिबद्धता, तकनीकी नवाचार और प्रशिक्षित मानव संसाधन के दम पर इस चुनौती को अवसर में बदलते हुए लाखों नागरिकों के लिए जीवनरेखा का कार्य किया है।

बीते पाँच वर्षों में 108 आपातकालीन सेवा का उद्देश्य केवल मरीज को अस्पताल तक पहुँचाना ही नहीं रहा, बल्कि “गोल्डन ऑवर” के भीतर गुणवत्तापूर्ण प्राथमिक चिकित्सा उपलब्ध कराकर जीवन रक्षा सुनिश्चित करना इसकी कार्यसंस्कृति का मूल आधार बना। सड़क दुर्घटनाएँ, हृदयाघात, प्रसव संबंधी आपात स्थितियाँ, गंभीर बीमारियाँ, प्राकृतिक आपदाएँ और बड़े धार्मिक एवं राष्ट्रीय आयोजन—हर परिस्थिति में यह सेवा 24×7 तत्परता के साथ सक्रिय रही।

आँकड़ों में दिखी सेवा की मजबूती
वर्ष 2020-21 में, कोविड-19 महामारी के दौरान, 108 सेवा के अंतर्गत कुल 1,06,768 आपात मामले दर्ज किए गए। सीमित संसाधनों और भारी दबाव के बावजूद सेवा ने राज्यभर में निर्बाध आपात सहायता उपलब्ध कराई।
वर्ष 2021-22 में आपात मामलों की संख्या में लगभग 48 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई और यह 1,58,070 तक पहुँच गई। कोविड की दूसरी लहर के दौरान बढ़ी गंभीरता के बावजूद 108 सेवा ने अपनी क्षमता सिद्ध की।
वर्ष 2022-23 में 1,62,301 मामलों के साथ पाँच वर्षों का सर्वाधिक आँकड़ा दर्ज हुआ। इसके बाद 2023-24 में यह संख्या घटकर 1,51,276 और 2024-25 में 1,38,369 रह गई। यह गिरावट स्वास्थ्य जागरूकता, समय पर प्राथमिक उपचार और स्थानीय स्वास्थ्य संस्थानों की मजबूती का सकारात्मक संकेत मानी जा रही है।

प्रतिक्रिया समय में निरंतर सुधार
दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में प्रतिक्रिया समय सबसे बड़ी चुनौती रहा है। इसके बावजूद ग्रामीण क्षेत्रों में औसत प्रतिक्रिया समय 2020-21 में 24.18 मिनट से घटकर 2021-22 में 20.34 मिनट हुआ। वहीं 2024-25 में यह 23.09 मिनट रहा। शहरी क्षेत्रों में 108 सेवा का प्रदर्शन और भी बेहतर रहा, जहाँ औसत प्रतिक्रिया समय 2020-21 में 13.13 मिनट से घटकर 2021-22 में 10.18 मिनट और 2024-25 में 12.48 मिनट दर्ज किया गया।

तकनीकी नवाचार और कॉल प्रबंधन
108 सेवा में आधुनिक कॉल ट्रायजिंग सिस्टम, GPS आधारित एंबुलेंस ट्रैकिंग, डिजिटल डेटा रिकॉर्डिंग और रियल-टाइम मॉनिटरिंग को प्रभावी रूप से लागू किया गया है। वर्ष 2020-21 में सेवा को 10,11,047 कॉल्स प्राप्त हुईं, जबकि 2024-25 में कॉल्स की संख्या बढ़कर 8,00,473 तक पहुँच गई, जो नागरिकों के बढ़ते भरोसे को दर्शाती है।

आपदाओं और बड़े आयोजनों में निर्णायक भूमिका
पिछले पाँच वर्षों में 108 सेवा ने कोविड-19 महामारी, चारधाम यात्रा, कुंभ मेला 2021, कांवड़ यात्रा, G-20 शिखर सम्मेलन और सिलक्यारा टनल रेस्क्यू जैसे बड़े आयोजनों एवं आपदाओं में त्वरित और प्रभावी चिकित्सा सहायता प्रदान कर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

मानव संसाधन बनी सबसे बड़ी ताकत
प्रशिक्षित एंबुलेंस पायलट, ईएमटी, कॉल हैंडलर और तकनीकी स्टाफ 108 सेवा की रीढ़ हैं। इन्हें एडवांस लाइफ सपोर्ट, ट्रॉमा केयर और आपदा प्रबंधन का नियमित प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

स्वास्थ्य सचिव का वक्तव्य
स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने कहा कि 108 आपातकालीन सेवा उत्तराखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ है। पिछले पाँच वर्षों के आँकड़े यह प्रमाणित करते हैं कि इस सेवा ने हर चुनौती का सामना मजबूती और संवेदनशीलता के साथ किया है। उन्होंने बताया कि भविष्य में ग्रामीण और दुर्गम क्षेत्रों में प्रतिक्रिया समय को और बेहतर करने, तकनीकी संसाधनों के उन्नयन और मानव संसाधन क्षमता को सशक्त बनाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। राज्य सरकार 108 आपातकालीन सेवा को और अधिक तेज़, मजबूत और जन-केंद्रित बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।


Our News, Your Views