उत्तराखंड में खनन सुधारों से राजस्व में चार गुना वृद्धि, केंद्र ने दी ₹200 करोड़ की विशेष सहायता
देहरादून, 31 जनवरी 2026:
खनन क्षेत्रों को लेकर आम धारणा में अक्सर अवैध गतिविधियाँ, पारदर्शिता की कमी और पर्यावरणीय चिंताएँ बनी रहती थीं। लेकिन उत्तराखंड में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में लागू की गई नई खनन नीति और सुधारों ने इस परिदृश्य को बदलकर दिखा दिया है।
सरकार ने सितंबर 2024 में नई खनन नीति लागू की थी, जिसमें प्रमुख बदलावों के तौर पर ई-नीलामी के माध्यम से खनन लॉट आवंटन, सेटेलाइट और डिजिटल निगरानी प्रणाली के साथ खनन गतिविधियों का निरीक्षण, तथा अवैध खनन पर सख्त रोक शामिल हैं।
इन सुधारों के प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखने लगे हैं। नीति लागू होने से पहले राज्य को खनन से लगभग 300 करोड़ रुपये का सालाना राजस्व प्राप्त होता था। अब यह राजस्व 1200 करोड़ रुपये से ऊपर पहुंच गया है, यानी चार गुना से अधिक वृद्धि हुई है।
मुख्यमंत्री धामी ने प्रशासन और पुलिस को अवैध खनन पर प्रभावी कार्रवाई के निर्देश दिये, जिससे अवैध गतिविधियों में कमी आई और पारदर्शी तंत्र ने निवेशकों तथा स्थानीय हितधारकों का भरोसा बढ़ाया है।
विशेष सहायता और राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता
खनन सुधारों में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए उत्तराखंड को देशभर में दूसरा स्थान प्राप्त हुआ है। इसी के परिणामस्वरूप केंद्र सरकार ने वित्तीय वर्ष 2025–26 के लिए “स्कीम फॉर स्पेशल असिस्टANCE टू स्टेट्स फॉर कैपिटल इन्वेस्टमेंट (SASCI)” के तहत राज्य को ₹200 करोड़ की विशेष सहायता (लोन) मंजूर की है।
केंद्र द्वारा दी जा रही यह सहायता खनन सुधारों — जैसे ई-नीलामी, तकनीकी निगरानी और पारदर्शिता बढ़ाने — को और मजबूती प्रदान करेगी तथा राज्य को सतत और पर्यावरण-संवेदनशील खनन प्रथाओं को लागू करने में मदद करेगी।
क्या बदला उत्तराखंड में?
ई-नीलामी से पारदर्शी खनन लॉट आवंटन
आधुनिक माइनिंग सर्विलांस और सेटेलाइट निगरानी
अवैध खनन पर प्रभावी रोक
डिजिटल ट्रैकिंग और निरीक्षण
राजस्व में रिकॉर्ड वृद्धि
ये बदलाव न केवल सरकार की राजस्व क्षमता को बढ़ा रहे हैं, बल्कि खनन को छोटे निर्माण कार्यों, सार्वजनिक परियोजनाओं और रोजगार सृजन के लिए एक अधिक विश्वसनीय स्रोत भी बना रहे हैं।
