ये कैसा लॉक डाउन ?

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रिपोर्ट- ओम जोशी
कोरोना के बढ़ते प्रभाव से निपटने की रणनीति में सरकार के निर्देशों के अनुसार बीते कल से शुरू हुए दो दिवसीय लॉकडाउन का पहला दिन कई अगर मगर के सवालों के साथ शुरू हुआ। शासन के निर्देशों अनुसार पुलिस सक्रिय नजर आयी,शहर के प्रमुख चौराहों पर पुलिस की नाकेबंदी और गलियों में पुलिस गस्त करती दिखती रही।
वहीँ शासन के दिशा-निर्देशों के मुताबिक नियमो का पालन करने में आमजन व्यस्त रहा और दिन भर इस पहेली(लॉकडाउन ) को सुलझाने में व्यस्त रहा। दवा, दूध और सब्जी की दुकाने खुली रही, वहीँ कहीं कहीं नुक्कड़ों पर कुछ परचून की दुकाने भी खुली दिखाई दी। मीट और शराब की दुकाने खुली रही। 

स्पष्ट आदेश न होने के चलते आमजन गफलत में नज़र आया, वहीं व्यापारी वर्ग खासकर लॉकडाउन में जारी दिशा निर्देशों से उत्पन्न हुई समस्याओं पर दिन भर रिएक्ट करता दिखाई दिया।

आईये जानते हैं किस तरह के रिएक्शन सामने आये,जब “The mountain stories” ने आमजन और व्यापारी वर्ग से बातचीत की ?
जहाँ आमजन शराब और मीट की दुकाने खुलने की पहेली में उलझा रहा तो वहीँ  शराब और मीट विक्रेता काम न होने का अफसोस जाहिर करते दिखाई दिए।
एक शराब विक्रेता कहते हैं। …
“कस्टमर आ नहीं रहा आवागमन के आदेश स्पष्ट नहीं है वो डर रहा है पुलिस के चालान से ”  
फिर वे थोड़ा मुस्कराते हुए कहते हैं…. “चालान के साथ महंगी पड़ जाती है कस्टमर को ” 
वहीँ एक मीट शॉप मालिक कहते हैं… “क्या करें बैठना पड़ रहा है दूकान में, दो एक कस्टमर आये हैं…..उम्मीद पर दुनिया कायम है”
कहीं कहीं लोग ये भी कहते दिखाई दिए की…. “शासन को लॉकडाउन की गाइडलाइन जल्द जारी करनी चाहिए थी जिससे की हमें  अपनी तैयारी करने का समय मिल सके”
वहीँ विपक्ष शुरू से लॉकडाउन को लेकर हमलावर रहा, जहाँ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष  प्रीतम सिंह ने सरकार को घेरते इसे जनविरोधी और शराब के प्रचलन को बढ़ाने वाला बताया तो वहीँ प्रतिपक्ष ने इस फैसले के औचित्य पर सवाल उठाये वे कहती हैं कि इससे छोटे कारोबारियों सामने रोजी रोटी का संकट पैदा होगा।

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