उत्तराखंड ऊर्जा निगमों में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, यूपीसीएल-यूजेवीएनएल के एमडी कार्यमुक्त

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उत्तराखंड ऊर्जा निगमों में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, यूपीसीएल-यूजेवीएनएल के एमडी कार्यमुक्त

देहरादून:
उत्तराखंड सरकार ने ऊर्जा विभाग के अंतर्गत आने वाले प्रमुख निगमों में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए कई वरिष्ठ अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से कार्यमुक्त कर दिया है। इनमें उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीसीएल) और उत्तराखंड जल विद्युत निगम लिमिटेड (यूजेवीएनएल) के प्रबंध निदेशक (एमडी) भी शामिल हैं।

प्रमुख सचिव ऊर्जा आर मीनाक्षी सुंदरम द्वारा जारी आदेश के अनुसार, यूपीसीएल के एमडी अनिल कुमार यादव को पद से कार्यमुक्त कर दिया गया है। उन्हें 30 जून 2024 से दो वर्ष का सेवा विस्तार दिया गया था, लेकिन अब उनके कार्यकाल को समाप्त करते हुए उन्हें अवमुक्त कर दिया गया है।

इसी तरह, यूजेवीएनएल के एमडी संदीप सिंघल को भी पद से हटा दिया गया है। उन्हें भी सेवानिवृत्ति के बाद 30 जून 2024 से दो वर्ष का सेवा विस्तार मिला था, जिसे अब समाप्त कर दिया गया है।

नई नियुक्तियां और अतिरिक्त प्रभार
सरकार ने यूपीसीएल के एमडी पद का अतिरिक्त प्रभार यूजेवीएनएल के महाप्रबंधक (यमुना वैली-प्रथम, डाकपत्थर) और पिटकुल के प्रभारी निदेशक (परिचालन) गजेंद्र सिंह बुदियाल को सौंपा है। वे यह जिम्मेदारी नियमित चयन होने तक संभालेंगे। हालांकि, इस अतिरिक्त दायित्व के लिए उन्हें कोई अतिरिक्त वेतन या भत्ता नहीं दिया जाएगा।

वहीं, यूजेवीएनएल के एमडी पद की जिम्मेदारी महाप्रबंधक (भागीरथी वैली) और प्रभारी निदेशक (परिचालन) अजय कुमार सिंह को सौंपी गई है। वे भी यह कार्यभार नियमित नियुक्ति तक अतिरिक्त रूप से निभाएंगे, बिना किसी अतिरिक्त वित्तीय लाभ के।

अन्य कार्रवाई
इसके अलावा, यूपीसीएल के निदेशक (परियोजना) अजय कुमार अग्रवाल को भी कार्यमुक्त कर दिया गया है। फिलहाल इस पद पर किसी नई नियुक्ति की घोषणा नहीं की गई है।

पृष्ठभूमि

  • अनिल कुमार यादव को 29 अक्टूबर 2021 को यूपीसीएल का एमडी नियुक्त किया गया था, जिनका कार्यकाल तीन वर्ष या 60 वर्ष की आयु तक निर्धारित था।

  • इसके बाद 9 अक्टूबर 2024 को उन्हें सेवा विस्तार दिया गया था।

  • इसी प्रकार, संदीप सिंघल को 29 जनवरी 2020 को यूजेवीएनएल का एमडी बनाया गया था और 15 मार्च 2024 को उन्हें भी सेवा विस्तार मिला था।

अब सरकार द्वारा इन दोनों अधिकारियों को समय से पहले कार्यमुक्त कर दिया गया है, जिससे ऊर्जा निगमों में नेतृत्व स्तर पर बड़ा बदलाव देखने को मिला है।

संभावित असर
इस फैसले को ऊर्जा विभाग में प्रशासनिक पुनर्संरचना और कार्यप्रणाली में तेजी लाने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। आने वाले समय में नियमित नियुक्तियों के बाद इन निगमों की कार्यशैली में और बदलाव संभव है।


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