देहरादून की शराब दुकानों के आवंटन पर हाईकोर्ट की रोक, राज्य सरकार से मांगा जवाब
नैनीताल। High Court of Uttarakhand ने देहरादून के डालनवाला स्थित परेड ग्राउंड और राजपुर रोड पर संचालित अंग्रेजी शराब की दुकानों के आवंटन को लेकर दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए महत्वपूर्ण आदेश जारी किए हैं। हाईकोर्ट ने फिलहाल एक्साइज कमिश्नर द्वारा जारी आवंटन आदेश पर रोक लगा दी है तथा राज्य सरकार और संबंधित पक्षकारों से जवाब तलब किया है।
मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश Manoj Kumar Gupta और न्यायमूर्ति Subhash Upadhyay की खंडपीठ में हुई।
अगली सुनवाई तक दुकानों के संचालन पर रोक
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि जिला अधिकारी कोर्ट के निर्देशों का शीघ्र अनुपालन सुनिश्चित करें तथा मामले की जांच आख्या अदालत में प्रस्तुत करें। कोर्ट ने दोनों शराब दुकानों के संचालन पर अगली तिथि तक रोक लगा दी है।
साथ ही अदालत ने विपक्षी पक्षों सहित आबकारी आयुक्त को एक सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।
पूर्व लाइसेंसधारियों ने दायर की याचिका
मामले में गौरव मल्होत्रा एवं अन्य की ओर से याचिका दायर कर कहा गया कि वे वर्ष 2025-26 के लिए संबंधित दुकानों के पूर्व लाइसेंसधारी थे। याचिका के अनुसार उन्होंने 16 फरवरी 2026 को दुकान के नवीनीकरण के लिए जिला आबकारी अधिकारी के समक्ष आवेदन प्रस्तुत किया था, लेकिन विभाग ने आवेदन स्वीकार नहीं किया।
याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि अगले ही दिन 17 फरवरी 2026 को नियमों की अनदेखी करते हुए दुकानों का आवंटन अन्य पक्षों को कर दिया गया।
लॉटरी प्रक्रिया न अपनाने का आरोप
याचिका में कहा गया है कि आबकारी नीति में स्पष्ट प्रावधान है कि यदि किसी दुकान का नवीनीकरण नहीं होता है तो उसका आवंटन लॉटरी प्रक्रिया के माध्यम से किया जाना चाहिए। आरोप है कि इस प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।
इसके अलावा याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि एक्साइज कमिश्नर ने नियमों की अनदेखी करते हुए एक कैबिनेट मंत्री के ओएसडी और पीआरओ को लाइसेंस आवंटित कर दिया, जबकि दोनों सरकारी विभाग में कार्यरत हैं। याचिका में इस पूरे मामले की जांच कर संबंधित अधिकारियों और लाभार्थियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की मांग की गई है।
कोर्ट ने मांगी विस्तृत जांच रिपोर्ट
खंडपीठ ने मामले को गंभीर मानते हुए जिला प्रशासन और आबकारी विभाग से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। अब अगली सुनवाई में राज्य सरकार और संबंधित विभागों के जवाब के आधार पर मामले में आगे की कार्रवाई तय होगी।
