पेंशन में कटौती न होने की जानकारी छिपाना भी जिम्मेदारी से बचना नहीं: नैनीताल हाईकोर्ट

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पेंशन में कटौती न होने की जानकारी छिपाना भी जिम्मेदारी से बचना नहीं: नैनीताल हाईकोर्ट

नैनीताल। नैनीताल हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि यदि किसी पेंशनभोगी को पेंशन से निर्धारित कटौती किए बिना पूरी पेंशन राशि का भुगतान लगातार मिलता रहता है, तो उसकी भी जिम्मेदारी है कि वह संबंधित विभाग को इस त्रुटि की जानकारी दे। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि प्रशासनिक गलती के कारण प्राप्त अतिरिक्त राशि को पेंशनभोगी अपने पास नहीं रख सकता, विशेषकर तब जब पेंशन नियमावली और पेंशन भुगतान आदेश में मासिक कटौती का स्पष्ट प्रावधान मौजूद हो।

मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने की। न्यायालय ने सुनवाई के बाद रिकवरी आदेश को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी और ट्रेजरी विभाग द्वारा शुरू की गई वसूली प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।

क्या था मामला?

याचिकाकर्ता ने वरिष्ठ कोषाधिकारी (सीनियर ट्रेजरी ऑफिसर) के उस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, जिसके तहत उससे अतिरिक्त भुगतान की गई पेंशन राशि की रिकवरी की जा रही थी। याचिकाकर्ता ने सेवानिवृत्ति के समय पेंशन कम्यूटेशन (आंशिक पेंशन के बदले एकमुश्त राशि) का विकल्प चुना था और इसके तहत उसे 18,99,697 रुपये की एकमुश्त राशि प्राप्त हुई थी।

पेंशन भुगतान आदेश (पीपीओ) के अनुसार उसकी पेंशन से नवंबर 2017 से अगस्त 2025 तक मासिक कटौती की जानी थी। हालांकि विभागीय त्रुटि के कारण उसकी पेंशन से कोई कटौती नहीं की गई और उसे पूरी पेंशन का भुगतान होता रहा।

बाद में ऑडिट के दौरान यह गलती सामने आई, जिसके बाद विभाग ने अतिरिक्त भुगतान की गई राशि की रिकवरी के आदेश जारी किए। साथ ही याचिकाकर्ता की पेंशन से 20 हजार रुपये प्रतिमाह अतिरिक्त कटौती कर वसूली करने का निर्णय लिया गया।

याचिकाकर्ता ने क्या कहा?

याचिकाकर्ता की ओर से अदालत में दलील दी गई कि गलती पूरी तरह विभाग की थी, इसलिए उससे कोई रिकवरी नहीं की जानी चाहिए। यह भी कहा गया कि वह एक सेवानिवृत्त कर्मचारी है और अपनी आजीविका के लिए पेंशन पर निर्भर है। ऐसे में 20 हजार रुपये प्रतिमाह की कटौती उसके लिए आर्थिक रूप से कठिनाई पैदा करेगी।

हाईकोर्ट की टिप्पणी

खंडपीठ ने अपने निर्णय में कहा कि जब पेंशन भुगतान आदेश में मासिक कटौती का स्पष्ट उल्लेख था, तब याचिकाकर्ता का भी दायित्व था कि वह विभाग को इस त्रुटि की जानकारी देता। न्यायालय ने माना कि याचिकाकर्ता ने विभाग को इस संबंध में कोई सूचना नहीं दी और अतिरिक्त भुगतान प्राप्त करता रहा।

कोर्ट ने कहा कि अनजाने में हुई प्रशासनिक त्रुटि का लाभ लेकर अतिरिक्त राशि अपने पास रखना उचित नहीं माना जा सकता। इसलिए विभाग द्वारा जारी रिकवरी आदेश और पेंशन से 20 हजार रुपये प्रतिमाह कटौती कर वसूली की कार्रवाई वैध है।

अंततः हाईकोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए ट्रेजरी विभाग की रिकवरी प्रक्रिया को सही ठहराया और उसमें हस्तक्षेप से इनकार कर दिया।


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