आईजीएनएफए देहरादून में 2024 बैच के आईएफएस अधिकारियों का दीक्षांत समारोह सम्पन्न, केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने बांटे पदक
देहरादून। इन्दिरा गाँधी राष्ट्रीय वन अकादमी (आईजीएनएफए), देहरादून में प्रशिक्षणरत भारतीय वन सेवा (आईएफएस) 2024 बैच के परिवीक्षार्थियों का दीक्षांत समारोह शनिवार को वन अनुसंधान संस्थान (एफआरआई) के दीक्षांत गृह में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए और सफल परिवीक्षार्थियों को प्रमाणपत्र एवं पदक प्रदान किए।
अपने संबोधन में केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने प्रशिक्षण पूर्ण करने वाले अधिकारियों को बधाई देते हुए कहा कि उन्हें देश की प्रतिष्ठित वन अकादमी से उत्कृष्ट तकनीकी एवं नेतृत्व प्रशिक्षण प्राप्त हुआ है। उन्होंने विश्वास जताया कि जब ये अधिकारी अपने सेवा जीवन के महत्वपूर्ण दौर में होंगे, तब भारत स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे कर रहा होगा और विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को साकार करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका होगी।
उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में अधिकारियों को जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता के क्षरण और मरुस्थलीकरण जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना करना होगा। इन चुनौतियों से निपटने के लिए नवाचार, आधुनिक तकनीक और जनभागीदारी को समान महत्व देना आवश्यक है। उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) सहित आधुनिक तकनीकों का उपयोग मानवीय संवेदनाओं के साथ व्यावहारिक समाधान विकसित करने पर जोर दिया।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि किसी भी लोकसेवक की सफलता का आधार उच्च नैतिक मूल्य और कार्यकुशलता होती है। सीमित संसाधनों में बेहतर परिणाम देने की क्षमता, समय का सदुपयोग और समाज के प्रति समर्पण ही एक अधिकारी की वास्तविक पहचान बनाते हैं। उन्होंने अधिकारियों से केवल प्रशासक नहीं, बल्कि प्रभावी नेतृत्वकर्ता बनने का आह्वान किया।
इससे पूर्व आईजीएनएफए के निदेशक डॉ. राजेन्द्र प्रसाद खजूरिया ने निदेशक प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए बताया कि वर्ष 1938 से यह संस्थान देश की वन सेवाओं को प्रशिक्षित कर रहा है। उन्होंने बताया कि 20 माह के संशोधित प्रशिक्षण कार्यक्रम में भारतीय वन सेवा के 2024 बैच के 109 परिवीक्षाधीन अधिकारियों तथा भूटान के दो अधिकारी प्रशिक्षुओं सहित कुल 111 अधिकारियों ने भाग लिया। इनमें से 75 अधिकारियों ने 75 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त कर ऑनर्स डिप्लोमा हासिल किया।
उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण कार्यक्रम में वानिकी, वन्यजीव प्रबंधन, पर्यावरणीय सुशासन, उन्नत प्रौद्योगिकी और नेतृत्व विकास पर विशेष बल दिया गया। कुल प्रशिक्षण अवधि का लगभग 45 प्रतिशत हिस्सा क्षेत्रीय अभ्यासों, अध्ययन भ्रमणों और साहसिक गतिविधियों के लिए निर्धारित रहा। प्रशिक्षुओं ने शोध कार्यों, विशेष वैकल्पिक पाठ्यक्रमों तथा वन प्रबंधन एवं वन्यजीव संरक्षण से जुड़े व्यावहारिक अभ्यासों में भी सक्रिय भागीदारी की।
समारोह के दौरान उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले परिवीक्षार्थियों को विभिन्न पुरस्कार और पदक भी प्रदान किए गए। कार्यक्रम में अकादमी के अधिकारी, संकाय सदस्य, प्रशिक्षु अधिकारी एवं उनके परिजन उपस्थित रहे।
