Nutrition Council of India और Government Doon Medical College के बीच एमओयू, पोषण व जनस्वास्थ्य में संयुक्त पहल

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Nutrition Council of India और Government Doon Medical College के बीच एमओयू, पोषण व जनस्वास्थ्य में संयुक्त पहल

(देहरादून), उत्तराखंड। नेशनल कॉन्क्लेव ऑन न्यूट्रिशन एंड पब्लिक हेल्थ (NCICON-2026) के समापन अवसर पर Nutrition Council of India (एनसीआई) और राजकीय दून मेडिकल कॉलेज के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। यह सम्मेलन 21–22 फरवरी 2026 को दून मेडिकल कॉलेज परिसर में आयोजित हुआ, जिसमें देशभर से आए विशेषज्ञों ने पोषण और सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर व्यापक चर्चा की।

एमओयू के प्रमुख बिंदु

एमओयू के तहत एनसीआई और दून मेडिकल कॉलेज संयुक्त रूप से—

  • पोषण एवं सार्वजनिक स्वास्थ्य पर शोध परियोजनाएं संचालित करेंगे।

  • शैक्षणिक कार्यक्रमों और व्याख्यान शृंखला का आयोजन करेंगे।

  • जनसामान्य में पोषण जागरूकता अभियान चलाएंगे।

  • प्रशिक्षण, कार्यशालाओं और सेमिनार के माध्यम से विद्यार्थियों और स्वास्थ्यकर्मियों की क्षमता वृद्धि करेंगे।

इस पहल का उद्देश्य आने वाले वर्षों में पोषण संबंधी चुनौतियों के समाधान के लिए संस्थागत सहयोग को मजबूत करना है।

नई पुस्तकों का विमोचन

सम्मेलन के दौरान ‘The Physiology of Nutrition’ और ‘Fundamentals of Chrono Nutrition’ नामक पुस्तकों का विमोचन भी किया गया। विशेषज्ञों ने बताया कि क्रोनो न्यूट्रिशन (समय-आधारित पोषण) की अवधारणा आधुनिक जीवनशैली में स्वास्थ्य प्रबंधन के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

गर्भावस्था में पोषण पर विशेष जोर

दून मेडिकल कॉलेज की प्राचार्या डॉ. गीता जैन ने अपने संबोधन में गर्भावस्था के दौरान संतुलित पोषण के महत्व पर बल दिया। उन्होंने कहा कि “यदि माँ और शिशु स्वस्थ होंगे, तो देश का भविष्य भी उज्ज्वल होगा।” उन्होंने यह भी कहा कि मेडिकल कॉलेज के छात्र अध्ययन के साथ-साथ समुदाय में जाकर पोषण संबंधी जागरूकता बढ़ाने और बीमारियों की रोकथाम में सक्रिय भूमिका निभाएंगे।

विशेषज्ञों की भागीदारी

सम्मेलन में एनसीआई के पदाधिकारियों, शोधकर्ताओं, चिकित्सकों तथा विद्यार्थियों ने भाग लिया। चर्चा के दौरान कुपोषण, जीवनशैली-जनित रोगों और सार्वजनिक स्वास्थ्य नीति में पोषण की भूमिका जैसे विषयों पर विचार-विमर्श हुआ।

इस एमओयू को उत्तराखंड में पोषण एवं सार्वजनिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिससे शोध, शिक्षा और सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।


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