होली पर खान-पान और रंगों को लेकर स्वास्थ्य अलर्ट, विशेषज्ञों ने दी सावधानी की सलाह
देहरादून। रंगों के त्योहार होली पर जहां एक ओर पकवानों की खुशबू और उत्साह का माहौल रहता है, वहीं दूसरी ओर असावधानी स्वास्थ्य पर भारी पड़ सकती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने खासतौर पर खान-पान और रंगों के इस्तेमाल को लेकर एडवाइजरी जारी की है, ताकि त्योहार खुशियों के साथ सुरक्षित भी रहे।
खान-पान में बरतें संयम
होली पर गुझिया, मालपुआ, दही-बड़े और ठंडाई जैसे व्यंजनों का प्रचलन रहता है। चिकित्सकों के अनुसार—
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अधिक तला-भुना और मीठा खाने से गैस, अपच और शुगर लेवल बढ़ने का खतरा रहता है।
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डायबिटीज और हृदय रोग के मरीज मीठे और भारी भोजन का सीमित सेवन करें।
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बाजार से खरीदी गई मिठाइयों की गुणवत्ता और ताजगी अवश्य जांचें।
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खुली जगह पर रखे खाद्य पदार्थों से फूड पॉइजनिंग का खतरा बढ़ सकता है।
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ठंडाई या अन्य पेय पदार्थों का सेवन सीमित मात्रा में करें, विशेषकर यदि उनमें भांग या अन्य नशीले तत्व मिले हों।
विशेषज्ञों ने पर्याप्त पानी पीने और हल्का, सुपाच्य भोजन लेने की सलाह दी है, ताकि शरीर हाइड्रेटेड रहे और पाचन तंत्र पर अतिरिक्त दबाव न पड़े।
रंगों के इस्तेमाल में सावधानी जरूरी
होली पर इस्तेमाल होने वाले कई रंगों में रसायन मिले होते हैं, जो त्वचा, आंखों और बालों को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
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हर्बल या प्राकृतिक रंगों का उपयोग करें।
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केमिकल रंगों से त्वचा पर एलर्जी, खुजली, रैशेज और आंखों में जलन हो सकती है।
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रंग खेलने से पहले त्वचा और बालों में तेल या मॉइस्चराइज़र लगा लें, इससे रंग का दुष्प्रभाव कम होता है।
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आंख, मुंह या नाक में रंग जाने पर तुरंत साफ पानी से धोएं और आवश्यकता होने पर चिकित्सकीय परामर्श लें।
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छोटे बच्चों और बुजुर्गों को गहरे रंगों और पानी के प्रेशर से बचाएं।
विशेष वर्ग रखें अतिरिक्त ध्यान
अस्थमा, एलर्जी, त्वचा रोग या आंखों की समस्या से पीड़ित लोग भीड़भाड़ और धूल-गुलाल से दूरी बनाए रखें। गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं को भी केमिकल रंगों से दूर रखने की सलाह दी गई है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि थोड़ी सी सावधानी से होली को सुरक्षित और आनंददायक बनाया जा सकता है। संतुलित खान-पान, स्वच्छता और प्राकृतिक रंगों के उपयोग से यह पर्व सचमुच खुशियों और स्वास्थ्य के रंगों से भर सकता है।
