देहरादून में रक्षा कर्मचारियों का राष्ट्रीय मंथन आज से, कॉरपोरेटाइजेशन और आउटसोर्सिंग के खिलाफ बनेगी रणनीति
All India Defence Employees Federation (AIDEF) का 28वां राष्ट्रीय अधिवेशन आज से देहरादून में शुरू हो गया है। 7 मई से 9 मई 2026 तक आयोजित होने वाले इस तीन दिवसीय सम्मेलन में देशभर से लगभग 500 प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना है। सम्मेलन में रक्षा प्रतिष्ठानों, आयुध निर्माणियों, सेना, नौसेना, वायुसेना, डीआरडीओ, एमईएस और ईएमई सहित विभिन्न रक्षा इकाइयों के कर्मचारी प्रतिनिधि भाग लेंगे।
साल 1953 में स्थापित AIDEF देश के करीब तीन लाख रक्षा असैनिक कर्मचारियों का सबसे बड़ा संगठन माना जाता है। आगामी 24 मई को संगठन अपने स्थापना के 74वें वर्ष में प्रवेश करने जा रहा है, ऐसे में इस बार का अधिवेशन विशेष महत्व रखता है। आयोजन की जिम्मेदारी देहरादून की स्थानीय यूनियनों को सौंपी गई है।
सम्मेलन में सबसे प्रमुख मुद्दा आयुध निर्माणियों के कॉरपोरेटाइजेशन का रहेगा। फेडरेशन ने केंद्र सरकार द्वारा 41 आयुध फैक्ट्रियों को कॉरपोरेट ढांचे में परिवर्तित किए जाने के फैसले का विरोध करते हुए इसे कर्मचारियों और देश की रक्षा उत्पादन प्रणाली के हितों के खिलाफ बताया है। संगठन ने ऑर्डनेंस फैक्ट्री बोर्ड की पुरानी व्यवस्था को पुनः बहाल करने की मांग उठाई है।
इसके अलावा सम्मेलन में कर्मचारियों की सेवा सुरक्षा, आउटसोर्सिंग और निजीकरण पर रोक, संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण, अनुकंपा नियुक्तियों की बहाली तथा पुरानी पेंशन योजना को फिर से लागू करने जैसे मुद्दों पर व्यापक चर्चा होगी। नए श्रम कानूनों (लेबर कोड्स) को लेकर भी संगठन अपनी आपत्तियां दर्ज करेगा।
AIDEF ने 8वें वेतन आयोग के लिए भी कई मांगें रखी हैं। संगठन का कहना है कि न्यूनतम मूल वेतन 69 हजार रुपये निर्धारित किया जाए तथा फिटमेंट फैक्टर 3.833 लागू किया जाए। साथ ही कर्मचारियों को सेवा काल में कम से कम पांच पदोन्नतियां दिए जाने और पेंशन विसंगतियों को दूर करने की मांग भी सम्मेलन में प्रमुखता से उठेगी।
तीन दिनों तक चलने वाले इस राष्ट्रीय मंथन के समापन पर ‘देहरादून घोषणा’ जारी की जाएगी, जिसमें आगे की रणनीति और संभावित आंदोलन की रूपरेखा तय की जाएगी।
फेडरेशन के अध्यक्ष एसएन पाठक और महासचिव सी श्रीकुमार का कहना है कि यह सम्मेलन केवल रक्षा असैनिक कर्मचारियों के मुद्दों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि श्रमिक अधिकारों, सामाजिक सुरक्षा और सार्वजनिक क्षेत्र को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय मंच साबित होगा।
