बदरीनाथ धाम के निकट कंचनगंगा क्षेत्र में ग्लेशियर टूटा, कोई नुकसान नहीं
बदरीनाथ धाम के निकट कंचनगंगा क्षेत्र में ग्लेशियर टूटने की घटना सामने आई है। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें ऊंचाई वाले क्षेत्र से भारी मात्रा में बर्फ तेजी से नीचे की ओर आती दिखाई दे रही है। राहत की बात यह है कि अब तक इस घटना में किसी भी प्रकार के जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं मिली है।
जानकारी के अनुसार, हिमालयी क्षेत्रों में मौसम में तेजी से बदलाव, दिन के समय बढ़ती गर्मी और रात में तापमान में गिरावट के कारण ग्लेशियरों में दरारें पड़ने और बर्फ के बड़े हिस्सों के खिसकने जैसी घटनाएं सामने आती रहती हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक गर्मियों के दौरान ऊंचाई वाले इलाकों में ग्लेशियरों के पिघलने की प्रक्रिया तेज हो जाती है, जिससे एवलांच और ग्लेशियर टूटने का खतरा बढ़ जाता है।
चमोली पुलिस अधीक्षक सुरजीत सिंह पंवार ने बताया कि कंचनगंगा क्षेत्र में ग्लेशियर टूटने से किसी प्रकार की क्षति नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि यह ग्लेशियर हर वर्ष धीरे-धीरे नीचे की ओर खिसकता है और आगे चलकर कंचनगंगा क्षेत्र में आकर रुक जाता है। प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है।
प्रशासन ने स्थानीय लोगों और यात्रियों से अफवाहों पर ध्यान न देने तथा संवेदनशील पर्वतीय क्षेत्रों में सतर्कता बरतने की अपील की है। पुलिस और आपदा प्रबंधन विभाग क्षेत्र की निगरानी कर रहे हैं।
पहले भी सामने आ चुकी हैं ऐसी घटनाएं
गौरतलब है कि अक्टूबर 2025 में भी कंचनगंगा क्षेत्र में इसी प्रकार ग्लेशियर टूटने की घटना सामने आई थी। उस समय भी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, हालांकि किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई थी।
इसके अलावा फरवरी 2025 में माणा क्षेत्र में चीन सीमा के पास हुए भीषण हिमस्खलन में 54 मजदूर बर्फ में दब गए थे। भारतीय सेना और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के जवानों ने राहत एवं बचाव अभियान चलाकर 46 लोगों को सुरक्षित निकाला था, जबकि 8 लोगों की मौत हो गई थी।
उत्तराखंड के हिमालयी क्षेत्रों में लगातार बढ़ रही इस तरह की घटनाओं को देखते हुए प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग संवेदनशील इलाकों पर विशेष नजर बनाए हुए हैं। वहीं विशेषज्ञ लगातार पर्वतीय क्षेत्रों में सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं।
