सर्व पितृ अमावस्या पर हरिद्वार के नारायणी शिला मंदिर में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़, पितरों की शांति के लिए हुआ तर्पण
हरिद्वार। सर्व पितृ अमावस्या के अवसर पर शनिवार को धर्मनगरी हरिद्वार के नारायणी शिला मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली। सुबह से ही दूर-दराज के क्षेत्रों और देश के विभिन्न हिस्सों से लोग अपने पूर्वजों के निमित्त पूजा-अर्चना करने पहुंचे। दिनभर मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रही। लोगों ने विधि-विधान से श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान कर अपने पितरों की शांति के लिए प्रार्थना की।
पितृ पक्ष के अंतिम दिन पड़ने वाली सर्व पितृ अमावस्या को धार्मिक मान्यताओं के अनुसार विशेष महत्व दिया जाता है। मान्यता है कि इस दिन उन पूर्वजों का भी श्राद्ध और तर्पण किया जा सकता है, जिनकी मृत्यु तिथि की जानकारी नहीं है या किसी कारणवश पितृ पक्ष के दौरान उनका श्राद्ध नहीं हो पाया। इसी मान्यता के चलते नारायणी शिला मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे।
पितरों के निमित्त कराई गई विशेष पूजा
नारायणी शिला मंदिर में सर्व पितृ अमावस्या पर श्राद्ध, तर्पण, पिंडदान और नारायण बलि सहित विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान किए गए। मंदिर के एक पुजारी के अनुसार, पितृ पक्ष के दौरान यहां देश-विदेश से श्रद्धालु अपने पूर्वजों के निमित्त पूजा-अर्चना कराने पहुंचते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, नारायणी शिला में पितरों के नाम से जल अर्पित करने का भी विशेष महत्व है।
मंदिर में पहुंचे श्रद्धालुओं में अपने पूर्वजों के प्रति आस्था और पारिवारिक परंपराओं के निर्वहन का भाव देखने को मिला। कुछ लोग पितृ दोष से मुक्ति की कामना लेकर पहुंचे, जबकि कई श्रद्धालुओं ने अपने दिवंगत परिजनों की स्मृति में पूजा-अर्चना की।
पितरों की शांति और मुक्ति की कामना लेकर पहुंचे श्रद्धालु
नारायणी शिला मंदिर में पूजा कराने पहुंचे एक श्रद्धालु ने बताया कि उन्होंने इस मंदिर की धार्मिक महत्ता के बारे में काफी सुना था। इसी आस्था के साथ वह पितृ दोष से मुक्ति की कामना लेकर यहां पहुंचे और विधि-विधान से पूजा कराई।
वहीं, मंदिर में पहुंचे एक अन्य श्रद्धालु ने बताया कि सर्व पितृ अमावस्या पर यहां हर साल बड़ी संख्या में लोग अपने पूर्वजों की शांति के लिए पूजा-अर्चना करते हैं। उन्होंने कहा कि वह भी अपने पितरों के निमित्त अनुष्ठान करने के लिए मंदिर पहुंचे हैं।
एक स्थानीय श्रद्धालु के मुताबिक, उनके परिवार में अमावस्या के दिन नारायणी शिला मंदिर में पूजा करने की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है। इसी परंपरा का पालन करते हुए वह भी अपने पूर्वजों की शांति और मुक्ति की कामना लेकर मंदिर पहुंचे।
सुरक्षा के लिए किए गए इंतजाम
सर्व पितृ अमावस्या पर श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ को देखते हुए पुलिस प्रशासन की ओर से मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था की गई। मंदिर की ओर जाने वाले रास्तों पर बैरिकेडिंग लगाई गई और भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई। इसका उद्देश्य श्रद्धालुओं की आवाजाही को सुचारु बनाए रखना और पूजा-अर्चना के दौरान किसी तरह की अव्यवस्था से बचना था।
नारायणी शिला मंदिर के अलावा हरिद्वार के अन्य गंगा घाटों पर भी श्रद्धालु धार्मिक अनुष्ठान करते दिखाई दिए। सर्व पितृ अमावस्या के अवसर पर धर्मनगरी में दिनभर धार्मिक गतिविधियां जारी रहीं और श्रद्धालुओं ने अपने पूर्वजों को स्मरण करते हुए पूजा-अर्चना की।
