गंगोत्री हाईवे पर फिर मंडराया भू-धंसाव का खतरा, क्यार्क गांव के अस्तित्व पर भी संकट
उत्तरकाशी। भटवाड़ी क्षेत्र में पापड़गाड के समीप गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर एक बार फिर भू-धंसाव की स्थिति बनने से स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ गई है। सोमवार को हाईवे के लगभग 50 मीटर हिस्से में आई दरारें कुछ ही घंटों में गंभीर रूप ले गईं, जिसके चलते सड़क पर आवाजाही प्रभावित हो गई। भू-धंसाव की इस घटना ने न केवल गंगोत्री हाईवे बल्कि इसके ऊपर बसे क्यार्क गांव के अस्तित्व पर भी खतरे के संकेत पैदा कर दिए हैं।
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, गत वर्ष भी इसी स्थान पर भू-धंसाव के कारण गंगोत्री हाईवे कई दिनों तक बाधित रहा था। इसके बावजूद एक वर्ष बीत जाने के बाद भी क्षेत्र की स्थायी सुरक्षा के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए। सोमवार को सड़क पर लंबी दरारें पड़ने के बाद करीब चार घंटे तक वाहनों की आवाजाही बंद रही। इस दौरान केवल दोपहिया वाहनों को ही सावधानीपूर्वक गुजरने की अनुमति दी गई।
स्थिति को देखते हुए बॉर्डर रोड ऑर्गनाइजेशन (बीआरओ) ने तत्काल कार्रवाई करते हुए सड़क की दरारों को मिट्टी से भरकर यातायात बहाल कर दिया। हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि भारी मालवाहक वाहनों की आवाजाही और हल्की बारिश भी दोबारा भू-धंसाव का कारण बन सकती है। ऐसे में सड़क की स्थिरता को लेकर गंभीर आशंकाएं बनी हुई हैं।
ग्रामीणों ने बताया कि अगस्त 2025 में भी इस क्षेत्र में लगभग 100 मीटर गंगोत्री हाईवे धंस गया था, जिसके कारण तीन दिनों तक यातायात पूरी तरह ठप रहा। उस दौरान धराली और हर्षिल क्षेत्र तक प्रशासनिक और राहत दलों को पहुंचने में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा था, क्योंकि इस मार्ग का कोई वैकल्पिक रास्ता उपलब्ध नहीं है।
पूर्व प्रधान विपिन राणा, रवि रावत और प्रताप प्रकाश पंवार ने कहा कि हाईवे का लगातार धंसना क्यार्क गांव के लिए गंभीर खतरे का संकेत है। उनका कहना है कि पापड़गाड से पानी के साथ बहकर आने वाला मलबा और बड़े बोल्डर गंगोत्री हाईवे के मोटर पुल तथा क्यार्क गांव दोनों के लिए दोहरा खतरा पैदा कर रहे हैं। ग्रामीणों ने भागीरथी नदी की ओर से सुरक्षात्मक कार्य कराने की मांग की है।
इस संबंध में जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने बताया कि बॉर्डर रोड ऑर्गनाइजेशन द्वारा टीएचडीसी से क्षेत्र का सर्वेक्षण कराया जा रहा है। साथ ही सुरक्षा उपायों के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की जा रही है। उन्होंने आश्वासन दिया कि सर्वेक्षण और डीपीआर की प्रक्रिया पूरी होते ही आवश्यक सुरक्षा कार्य शुरू कर दिए जाएंगे।
