कैलाश मानसरोवर यात्रा 2026 का अंतिम दल टनकपुर पहुंचा, सोमवार को यात्रा सत्र होगा संपन्न
टनकपुर/खटीमा। कैलाश मानसरोवर यात्रा 2026 अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच गई है। रविवार शाम यात्रा का दसवां और अंतिम दल चंपावत जिले के टनकपुर पहुंचा, जहां शारदा पर्यटक आवास गृह (टीआरसी) में तीर्थयात्रियों का पारंपरिक और भव्य स्वागत किया गया। सोमवार सुबह इस अंतिम दल के टनकपुर से रवाना होने के साथ ही वर्ष 2026 का कैलाश मानसरोवर यात्रा सत्र भी औपचारिक रूप से संपन्न हो जाएगा।
देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचे 44 सदस्यीय अंतिम जत्थे के स्वागत में टीआरसी कर्मियों, मां पूर्णागिरि पर्यावरण संरक्षण समिति तथा स्थानीय बच्चों ने विशेष व्यवस्थाएं कीं। बुरांश और माल्टा से बने पारंपरिक वेलकम ड्रिंक के साथ यात्रियों का अभिनंदन किया गया। स्वागत से अभिभूत तीर्थयात्रियों ने उत्तराखंड की आतिथ्य परंपरा की सराहना की।
टीआरसी प्रबंधक मनोज कुमार ने बताया कि अंतिम दल में कुल 44 तीर्थयात्री शामिल हैं, जिनमें 28 पुरुष और 16 महिलाएं हैं। यह दल देश के 12 राज्यों का प्रतिनिधित्व करता है। इनमें बिहार से 1, दिल्ली से 4, गुजरात से 10, जम्मू-कश्मीर से 1, झारखंड से 2, मध्य प्रदेश से 2, महाराष्ट्र से 4, राजस्थान से 5, तमिलनाडु से 2, उत्तर प्रदेश से 11, उत्तराखंड से 1 तथा पश्चिम बंगाल से 1 तीर्थयात्री शामिल हैं। सबसे अधिक 11 यात्री उत्तर प्रदेश से हैं।
इस अंतिम जत्थे में विभिन्न आयु वर्ग के श्रद्धालु शामिल हैं। गुजरात के 21 वर्षीय जय रघुवीर भाई डांगर सबसे कम उम्र के तीर्थयात्री हैं, जबकि राजस्थान के 67 वर्षीय आलोक कुमार सबसे अधिक आयु के यात्री हैं। अलग-अलग राज्यों से आए श्रद्धालुओं के टनकपुर पहुंचने पर उनका पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ स्वागत किया गया।
रविवार रात सभी तीर्थयात्री शारदा पर्यटक आवास गृह में विश्राम करेंगे। इसके बाद सोमवार सुबह उन्हें अगले पड़ाव के लिए रवाना किया जाएगा। अंतिम दल के आगमन के साथ ही टनकपुर में कैलाश मानसरोवर यात्रियों के स्वागत का सिलसिला भी पूर्ण हो गया है।
गौरतलब है कि कैलाश मानसरोवर यात्रा 2026 के पहले दल को 5 जुलाई को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने टनकपुर से रवाना किया था। पहले दल में 49 तीर्थयात्री शामिल थे। अब दसवें और अंतिम दल के प्रस्थान के साथ इस वर्ष की यात्रा का सफल समापन हो जाएगा।
पूरे यात्रा सत्र के दौरान टनकपुर स्थित शारदा पर्यटक आवास गृह ने यात्रियों के स्वागत, ठहराव और विदाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यात्रा से जुड़े अधिकारियों के अनुसार सभी व्यवस्थाएं सुचारु रूप से संचालित की गईं और तीर्थयात्रियों ने उत्तराखंड में मिले आत्मीय स्वागत और सहयोग की सराहना की।
