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अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने की मांग पर कांग्रेस का कैंडल मार्च, वीआईपी की राज्यपाल नियुक्ति रद्द करने की उठाई मांग

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अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने की मांग पर कांग्रेस का कैंडल मार्च, वीआईपी की राज्यपाल नियुक्ति रद्द करने की उठाई मांग

देहरादून। अंकिता भंडारी हत्याकांड में न्याय की मांग को लेकर उत्तराखंड में राजनीतिक सरगर्मियां तेज हैं। मामले की सीबीआई जांच के बीच उत्तराखंड कांग्रेस ने देहरादून में कैंडल मार्च निकालकर विरोध जताया। कांग्रेस नेताओं ने अंकिता को न्याय दिलाने के साथ ही विवादों में घिरे कथित वीआईपी की राज्यपाल पद पर नियुक्ति निरस्त करने की मांग उठाई।

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल के नेतृत्व में निकाला गया कैंडल मार्च प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय से शुरू हुआ। कार्यकर्ता घंटाघर तक पहुंचे और वहां से वापस कांग्रेस भवन लौटकर मार्च का समापन किया। इसमें प्रदेश प्रभारी कुमारी शैलजा, पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य, प्रीतम सिंह और हरक सिंह रावत समेत पार्टी के कई नेता और कार्यकर्ता शामिल हुए।

कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर उठाए सवाल

कैंडल मार्च के दौरान गणेश गोदियाल ने कहा कि अंकिता भंडारी को न्याय दिलाना केवल एक आपराधिक मामले तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उत्तराखंड के सम्मान और अस्मिता से भी जुड़ा विषय है। उन्होंने सवाल उठाया कि कथित वीआईपी की भूमिका को लेकर जांच की मांग किए जाने के बावजूद संबंधित व्यक्ति को राज्यपाल नियुक्त क्यों किया गया।

गोदियाल ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार के इस फैसले से लोगों के मन में संदेह बढ़ा है। उन्होंने कहा कि अंकिता के माता-पिता और अन्य लोग मामले में सीबीआई जांच की मांग कर रहे हैं, ऐसे में जांच के निष्कर्ष सामने आने तक इन सवालों का जवाब मिलना जरूरी है।

पूर्व मंत्री हरक सिंह रावत ने भी राज्यपाल की नियुक्ति पर सवाल उठाते हुए इसे निरस्त करने की मांग की। उन्होंने कहा कि जब मामले की जांच सीबीआई कर रही है, तो जांच पूरी होने से पहले नियुक्ति को लेकर उठ रहे सवालों पर केंद्र सरकार को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

कांग्रेस ने दावा किया कि इस मुद्दे को लेकर उत्तराखंड के साथ-साथ अन्य स्थानों पर भी विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं।

पूर्व विधायक सुरेश राठौर से सीबीआई की पूछताछ

इधर, अंकिता भंडारी प्रकरण से जुड़े एक अन्य घटनाक्रम में सीबीआई ने हरिद्वार के बीएचईएल क्षेत्र स्थित शिवालिक गेस्ट हाउस में भाजपा के पूर्व विधायक सुरेश राठौर से करीब तीन घंटे तक पूछताछ की। पूछताछ के बाद राठौर घर लौट गए।

यह कार्रवाई अभिनेत्री उर्मिला सनावर की ओर से सोशल मीडिया पर साझा की गई एक ऑडियो क्लिप और उससे जुड़े दावों के बाद सामने आए मामले के सिलसिले में हुई। ऑडियो में कथित वीआईपी का जिक्र होने के दावे किए गए थे। हालांकि, ऑडियो में किए गए दावों और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।

पूछताछ के बाद सुरेश राठौर ने कहा कि उन्होंने जांच अधिकारियों के सामने अपना पक्ष रखा है और उनके बयान दर्ज किए गए हैं। उन्होंने जांच में पूरा सहयोग करने की बात कही। सीबीआई ने पूछताछ में पूछे गए सवालों या उसके निष्कर्षों के बारे में कोई आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की है।

इसी बीच उर्मिला सनावर ने दावा किया कि सीबीआई की टीम उनके सहारनपुर स्थित आवास पर पहुंची थी। उनके अनुसार, उस समय वह दिल्ली में थीं और उन्होंने बाद में मिलने का समय देने की बात कही।

अंकिता के माता-पिता ने भी सीबीआई अधिकारियों से की मुलाकात

मामले में अंकिता के माता-पिता लगातार निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। हाल ही में वे दिल्ली में इंडिया गेट पर भी प्रदर्शन कर चुके हैं। इस दौरान राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा ने उनसे मुलाकात कर समर्थन जताया था। बाद में पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया, हालांकि उन्हें रिहा कर दिया गया।

इसके बाद सांसद अनिल बलूनी की पहल पर अंकिता के माता-पिता ने नई दिल्ली में सीबीआई मुख्यालय पहुंचकर वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात की और ज्ञापन सौंपा। उन्होंने मामले के सभी पहलुओं की जांच कर जल्द कार्रवाई किए जाने की मांग की। अधिकारियों की ओर से उन्हें निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिए जाने की जानकारी सामने आई है।

माता-पिता के प्रदर्शन के समर्थन में उत्तराखंड कांग्रेस ने भी देहरादून में लोक भवन कूच का प्रयास किया था। इस दौरान पुलिस के साथ धक्का-मुक्की हुई। पुलिस ने इस घटनाक्रम को लेकर कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं समेत 30 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है।

जांच के नतीजों पर टिकी निगाहें

अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर अब न्याय की मांग के साथ कथित वीआईपी की भूमिका और राज्यपाल नियुक्ति का मुद्दा भी राजनीतिक बहस के केंद्र में है। कांग्रेस नियुक्ति रद्द करने की मांग कर रही है, जबकि सीबीआई की ओर से जांच के निष्कर्ष सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।

ऐसे में सबसे अहम सवाल यही है कि जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और अंकिता के परिवार को न्याय दिलाने की दिशा में आगे क्या कार्रवाई होती है। कथित वीआईपी से जुड़े आरोपों को जांच में पुष्टि होने तक आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।


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