चकराता के कथित वायरल ऑडियो मामले में FIR, चमन सिंह और राजपाल सिंह पर धमकी व गाली-गलौज के आरोप

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चकराता के कथित वायरल ऑडियो मामले में FIR, चमन सिंह और राजपाल सिंह पर धमकी व गाली-गलौज के आरोप

देहरादून। उत्तराखंड के चकराता विधानसभा क्षेत्र से जुड़े कथित वायरल ऑडियो विवाद में पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। त्यूणी क्षेत्र के छुमरी निवासी बालक राम की शिकायत पर पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष चमन सिंह और पूर्व ब्लॉक प्रमुख राजपाल सिंह के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। दोनों पर गाली-गलौज करने और आपराधिक धमकी देने के आरोप हैं।

शिकायतकर्ता का आरोप है कि फोन पर बातचीत के दौरान उनकी दोनों बेटियों को कांग्रेस में शामिल होने के लिए दबाव का सामना करना पड़ा। इसी दौरान कथित तौर पर अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया गया और जान से मारने की धमकी दी गई। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।

मुख्यमंत्री ने पीड़ित परिवार से की बातचीत

मामले के सामने आने के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बालक राम की बेटी दीक्षा से फोन पर बात की और परिवार से पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने परिवार को हरसंभव सहयोग और सुरक्षा का भरोसा देते हुए पुलिस अधिकारियों को मामले की गंभीरता से जांच करने तथा नियमानुसार कार्रवाई के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में प्रत्येक नागरिक की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए आवश्यक सहयोग का आश्वासन भी दिया।

एसएसपी को सौंपा गया था प्रार्थनापत्र

इस मामले में बालक राम ने पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष मधु चौहान और अन्य भाजपा नेताओं के साथ देहरादून के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक प्रमेंद्र डोभाल को प्रार्थनापत्र सौंपा था। शिकायत पर एसएसपी ने नियमानुसार कार्रवाई का भरोसा दिया था।

पुलिस के अनुसार, चमन सिंह और राजपाल सिंह के खिलाफ संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर आरोपों की जांच शुरू कर दी गई है। बालक राम ऊर्जा निगम में दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी बताए गए हैं।

सोशल मीडिया पर ऑडियो वायरल होने के बाद बढ़ा विवाद

विवाद की शुरुआत सोशल मीडिया पर एक कथित ऑडियो के प्रसारित होने के बाद हुई। ऑडियो को लेकर आरोप लगाए गए कि बातचीत में बालक राम और उनके परिवार, विशेषकर उनकी बेटियों के प्रति अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया गया और उन्हें धमकाया गया। इस मामले में मधु चौहान ने भी पारदर्शी जांच की मांग उठाई थी।

फिलहाल पुलिस जांच के जरिए कथित ऑडियो की सत्यता, बातचीत के संदर्भ और शिकायत में लगाए गए आरोपों की पड़ताल की जानी है। प्राथमिकी दर्ज होना आरोपों की पुष्टि नहीं है; मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई जांच के निष्कर्षों के आधार पर होगी।


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