चुनाव से पहले यूकेडी में बड़ा उलटफेर, आशुतोष नेगी छह साल के लिए पार्टी से बाहर
देहरादून। उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों के बीच उत्तराखंड क्रांति दल (यूकेडी) ने अपने ही एक चर्चित नेता आशुतोष नेगी के खिलाफ बड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की है। पार्टी ने उन्हें छह साल के लिए निष्कासित करने के साथ प्राथमिक सदस्यता भी समाप्त कर दी है। पार्टी नेतृत्व ने यह कदम कथित तौर पर पार्टी विरोधी गतिविधियों के चलते उठाया है।
आशुतोष नेगी के खिलाफ कार्रवाई अचानक नहीं हुई। करीब दो महीने पहले ही यूकेडी ने उन्हें केंद्रीय उपाध्यक्ष के पद और अन्य संगठनात्मक जिम्मेदारियों से मुक्त कर दिया था। इसके बाद पार्टी नेतृत्व की ओर से उन्हें संगठन के हित में काम करने और पार्टी के निर्देशों का पालन करने की नसीहत भी दी गई थी। अब सदस्यता समाप्त करने का फैसला राजनीतिक रूप से खासा महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
रायपुर सीट की तैयारी के बीच बड़ा झटका
आशुतोष नेगी आगामी विधानसभा चुनाव में रायपुर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे थे। ऐसे में चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी के बीच पार्टी से बाहर होना उनके लिए बड़ा राजनीतिक मोड़ माना जा रहा है। साथ ही यूकेडी के लिए भी रायपुर सीट पर उसकी रणनीति को नए सिरे से तय करने की स्थिति बन गई है।
नेगी यूकेडी के मुखर नेताओं में गिने जाते रहे हैं और कई मुद्दों पर संगठन की आवाज को सड़क तक ले जाते दिखाई दिए हैं। इसी वजह से उनका निष्कासन केवल संगठनात्मक कार्रवाई नहीं, बल्कि आगामी चुनावी समीकरणों के लिहाज से भी चर्चा का विषय बन गया है।
पद से हटाने के बाद सदस्यता भी खत्म
यूकेडी की ओर से पहले जारी किए गए आदेश में आशुतोष नेगी को केंद्रीय उपाध्यक्ष पद समेत अन्य जिम्मेदारियों से तत्काल प्रभाव से मुक्त किया गया था। अब उसी कार्रवाई के आगे बढ़ते हुए पार्टी ने उन्हें प्राथमिक सदस्यता से भी बाहर कर दिया है। इससे साफ है कि पार्टी नेतृत्व और नेगी के बीच मतभेद केवल पद तक सीमित नहीं रहे।
1979 में बना था उत्तराखंड क्रांति दल
उत्तराखंड क्रांति दल की स्थापना 25 जुलाई 1979 को हुई थी। अलग उत्तराखंड राज्य की मांग को लेकर चले आंदोलन में यूकेडी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। राज्य गठन के बाद भी दल ने स्थानीय लोगों के अधिकार, क्षेत्रीय पहचान और उत्तराखंड के विकास से जुड़े मुद्दों को अपनी राजनीति के केंद्र में रखा।
हालांकि, उत्तराखंड बनने के बाद पार्टी वह राजनीतिक प्रभाव कायम नहीं रख सकी, जिसकी उम्मीद राज्य आंदोलन के दौर में बनी थी। अब 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले आशुतोष नेगी को पार्टी से बाहर किए जाने ने यूकेडी के भीतर संगठनात्मक समीकरणों और चुनावी रणनीति को लेकर नई चर्चा जरूर छेड़ दी है।
अब आगे क्या?
आशुतोष नेगी के निष्कासन के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि उनका अगला राजनीतिक कदम क्या होगा और रायपुर विधानसभा क्षेत्र में इसका क्या असर पड़ेगा। वहीं यूकेडी के सामने भी चुनाव से पहले संगठन को एकजुट रखने और अपने जनाधार को मजबूत करने की चुनौती बनी हुई है।
