रजनी रावत को हाईकोर्ट से राहत, स्थानांतरण और कार्यमुक्ति आदेशों पर लगाई अंतरिम रोक
नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने स्वास्थ्य महानिदेशालय में तैनात मुख्य प्रशासनिक अधिकारी रजनी रावत को बड़ी राहत देते हुए उनके स्थानांतरण और कार्यमुक्ति आदेशों के क्रियान्वयन पर अगली सुनवाई तक अंतरिम रोक लगा दी है। साथ ही न्यायालय ने राज्य सरकार को चार सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।
मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने की। याचिका में रजनी रावत ने स्वास्थ्य विभाग द्वारा प्रशासनिक आधार पर किए गए अपने स्थानांतरण को चुनौती दी थी।
याचिका के अनुसार रजनी रावत वर्तमान में स्वास्थ्य महानिदेशालय, देहरादून में मुख्य प्रशासनिक अधिकारी के पद पर कार्यरत हैं। उनका कहना है कि 30 जून 2025 को तत्कालीन महानिदेशक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण डॉ. सुनीता टम्टा द्वारा उनके संबंध में प्रतिकूल टिप्पणियों वाली रिपोर्ट शासन को भेजी गई थी, जो करीब सात माह बाद 4 फरवरी 2026 को शासन के समक्ष प्रस्तुत हुई। इसके आधार पर 13 फरवरी 2026 को उनका स्थानांतरण जिला अस्पताल चमोली कर दिया गया था।
याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि उन्होंने इस कार्रवाई के खिलाफ लगातार सचिव और महानिदेशक स्वास्थ्य को प्रत्यावेदन दिए तथा सूचना का अधिकार अधिनियम (आरटीआई) के तहत प्रशासनिक आधार पर किए गए स्थानांतरण से संबंधित अभिलेख भी मांगे। विभाग द्वारा आरटीआई के जवाब में संबंधित सूचना उपलब्ध न होने की बात कही गई, जिससे उनके अनुसार उत्तराखंड स्थानांतरण अधिनियम, 2017 की धारा 18(4) का पालन नहीं किया गया।
याचिका में यह भी कहा गया कि इससे पहले भी उन्होंने हाईकोर्ट का रुख किया था। उस मामले में 25 फरवरी 2026 को हाईकोर्ट ने चमोली स्थानांतरण आदेश को निरस्त करते हुए विभाग को उनका पक्ष सुनकर नया निर्णय लेने का निर्देश दिया था। इसके अनुपालन में विभाग ने 24 मार्च 2026 को वह स्थानांतरण आदेश वापस ले लिया था।
हालांकि, इसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने 3 जुलाई 2026 को रजनी रावत का पुनः प्रशासनिक आधार पर देहरादून से जिला अस्पताल हरिद्वार स्थानांतरण कर दिया। इसके साथ ही 7 जुलाई और 20 जुलाई 2026 को उन्हें कार्यमुक्त करने के आदेश भी जारी कर दिए गए।
याचिका में आरोप लगाया गया कि विभाग ने उनके प्रत्यावेदनों पर निष्पक्ष विचार करने के बजाय पूर्व में लगाए गए आरोपों को आधार बनाकर नया स्थानांतरण आदेश जारी किया, जो हाईकोर्ट के पूर्व आदेश की भावना के विपरीत है।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से दलील दी गई कि याचिकाकर्ता को समिति की बैठक की मौखिक सूचना दी गई थी, लेकिन उन्होंने सुनवाई में सहयोग नहीं किया। हालांकि खंडपीठ ने प्रथम दृष्टया पाया कि रिकॉर्ड पर ऐसा कोई दस्तावेज उपलब्ध नहीं है, जिससे यह साबित हो सके कि याचिकाकर्ता को समिति के समक्ष उपस्थित होने के लिए विधिवत सूचना दी गई थी।
न्यायालय ने यह भी उल्लेख किया कि पूर्व में भी इसी प्रकार के आधार पर जारी स्थानांतरण आदेश को निरस्त किया जा चुका है। याचिका में यह भी कहा गया कि रजनी रावत ने 6 और 7 जुलाई 2026 को विस्तृत प्रत्यावेदन दिए थे। वहीं उनकी सास ने भी स्वास्थ्य मंत्री डॉ. सुबोध उनियाल को प्रार्थना पत्र भेजकर स्थानांतरण निरस्त करने का अनुरोध किया था, जिस पर मंत्री कार्यालय ने उचित सुनवाई कर निर्णय लेने के निर्देश दिए थे।
मामले को प्रथम दृष्टया विचारणीय मानते हुए हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से चार सप्ताह में जवाब मांगा है और 3 जुलाई 2026 के स्थानांतरण आदेश तथा 7 और 20 जुलाई 2026 के कार्यमुक्ति आदेशों के प्रभावी क्रियान्वयन पर अगली सुनवाई तक अंतरिम रोक लगा दी है।
अब इस मामले में अगली सुनवाई के दौरान राज्य सरकार के जवाब और प्रस्तुत अभिलेखों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।
