पानी छोड़ने से पहले जिला प्रशासन और यूएसडीएमए को देनी होगी पूर्व सूचना, रियल टाइम डेटा साझा करने के निर्देश
देहरादून। मानसून के दौरान संभावित आपदाओं से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए राज्य सरकार ने बांधों और बैराजों की निगरानी व्यवस्था को और अधिक सख्त करने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन ने राज्य के सभी प्रमुख बांधों, बैराजों और जल विद्युत परियोजनाओं को जलाशयों से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी नियमित रूप से साझा करने के निर्देश दिए हैं।
बुधवार को यूएसडीएमए स्थित राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र में आयोजित उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में सचिव विनोद कुमार सुमन ने कहा कि सभी प्रमुख बांध एवं बैराज प्रतिदिन सुबह 8 बजे और शाम 8 बजे अपने जलाशयों के जलस्तर, इनफ्लो, आउटफ्लो और डिस्चार्ज से संबंधित अद्यतन जानकारी अनिवार्य रूप से उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (यूएसडीएमए) को उपलब्ध कराएं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि किसी बांध या बैराज से पानी छोड़ा जाना प्रस्तावित हो तो इसकी पूर्व सूचना राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र और संबंधित जिला प्रशासन को दी जाए। सूचना में यह भी बताया जाए कि छोड़ा गया पानी किन क्षेत्रों तक कब पहुंचेगा, नदी के जलस्तर में कितनी वृद्धि हो सकती है और उससे संभावित प्रभाव क्या होंगे, ताकि संवेदनशील क्षेत्रों में समय रहते लोगों को सतर्क किया जा सके।
बैठक में सभी जल विद्युत परियोजनाओं को निर्देश दिए गए कि नदी जलस्तर सेंसर और डिस्चार्ज मॉनिटरिंग सिस्टम से प्राप्त आंकड़ों को एपीआई के माध्यम से रियल टाइम में यूएसडीएमए के साथ साझा किया जाए। साथ ही परियोजनाओं को अपने क्षेत्रों में ऑटोमैटिक वेदर स्टेशन और अर्ली वार्निंग सिस्टम का विस्तार करने के निर्देश भी दिए गए।
सचिव ने विशेष रूप से टिहरी हाइड्रो पावर कॉरपोरेशन को अपने कार्यक्षेत्र में ऑटोमैटिक वेदर स्टेशनों की संख्या बढ़ाकर 25 करने के निर्देश दिए, ताकि मौसम संबंधी आंकड़े अधिक सटीक और व्यापक स्तर पर उपलब्ध हो सकें।
उन्होंने कहा कि एक ही नदी तंत्र में स्थित अपस्ट्रीम और डाउनस्ट्रीम बांधों तथा बैराजों के बीच बेहतर समन्वय बेहद जरूरी है। सभी परियोजनाएं नियमित रूप से जलस्तर, वर्षा, डिस्चार्ज और अन्य महत्वपूर्ण सूचनाओं का आदान-प्रदान करें ताकि किसी भी आपात स्थिति में त्वरित और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
बैठक में अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी (प्रशासन) प्रकाश चंद्र ने सभी परियोजनाओं को डिस्चार्ज सायरन, चेतावनी उपकरणों और विभिन्न सेंसरों की नियमित जांच करने के निर्देश दिए। वहीं संयुक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी दिनेश कुमार पुनेठा ने बाढ़ संभावित क्षेत्रों में मशीनरी और आवश्यक उपकरणों की अग्रिम तैनाती तथा जल निकासी व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने पर जोर दिया।
राज्य सरकार का मानना है कि मानसून के दौरान समय पर सूचना और बेहतर समन्वय से संभावित आपदा जोखिमों को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
