किराने की दुकान में पिता का हाथ बंटाने वाली दिव्या जोशी बनीं पीसीएस अधिकारी, शिक्षा विभाग में हुआ चयन

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किराने की दुकान में पिता का हाथ बंटाने वाली दिव्या जोशी बनीं पीसीएस अधिकारी, शिक्षा विभाग में हुआ चयन

देहरादून। कठिन परिश्रम, दृढ़ संकल्प और आत्मविश्वास के बल पर कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। इस बात को सच साबित कर दिखाया है उत्तराखंड की होनहार बेटी दिव्या जोशी ने। दिव्या का चयन पीसीएस परीक्षा के माध्यम से उपशिक्षा अधिकारी / स्टाफ ऑफिसर / विधि अधिकारी (विद्यालयी शिक्षा विभाग) के पद पर हुआ है। उनकी इस उपलब्धि से परिवार, रिश्तेदारों और पूरे क्षेत्र में खुशी की लहर दौड़ गई है।

दिव्या जोशी एक साधारण परिवार से आती हैं। उनके पिता राजू जोशी एक छोटी किराने की दुकान संचालित करते हैं। आर्थिक और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच दिव्या ने कभी अपने सपनों को कमजोर नहीं पड़ने दिया। पढ़ाई के साथ-साथ वे अपने पिता की दुकान पर बैठकर उनका सहयोग भी करती थीं। दुकान की जिम्मेदारियां निभाने के बाद जो भी समय मिलता, उसे वे पूरी लगन के साथ अपनी पढ़ाई में लगाती थीं।

दिव्या की सफलता वर्षों की मेहनत, अनुशासन और संघर्ष का परिणाम है। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने अपने लक्ष्य पर फोकस बनाए रखा और अंततः पीसीएस जैसी प्रतिष्ठित परीक्षा में सफलता हासिल कर अपने सपनों को साकार कर दिखाया।

उनकी इस उपलब्धि ने न केवल उनके माता-पिता का सिर गर्व से ऊंचा किया है, बल्कि पूरे परिवार और क्षेत्र का नाम भी रोशन किया है। दिव्या की सफलता उन हजारों युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं और उन्हें पूरा करने के लिए संघर्षरत हैं।

बेटी की इस सफलता पर पिता राजू जोशी भावुक नजर आए। उन्होंने कहा कि दिव्या बचपन से ही मेहनती और लक्ष्य के प्रति समर्पित रही है। परिवार ने हमेशा उसका हौसला बढ़ाया और आज उसकी सफलता ने पूरे परिवार की मेहनत को सार्थक कर दिया है।

परिवार के सदस्यों का कहना है कि दिव्या ने यह साबित कर दिया है कि यदि व्यक्ति के भीतर कुछ कर गुजरने का जुनून और दृढ़ इच्छाशक्ति हो, तो परिस्थितियां चाहे कैसी भी हों, सफलता का रास्ता अवश्य बन जाता है।

दिव्या जोशी की यह उपलब्धि उत्तराखंड की बेटियों की बढ़ती भागीदारी और शिक्षा के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन का भी एक प्रेरक उदाहरण है।


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