नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर सियासत तेज, कांग्रेस ने भाजपा पर साधा निशाना

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नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर सियासत तेज, कांग्रेस ने भाजपा पर साधा निशाना

देहरादून/अल्मोड़ा (उत्तराखंड):
नारी शक्ति वंदन संशोधन अधिनियम के संसद में पेश होने के बाद गिरने को लेकर देशभर में राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। जहां एक ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा नेता इसके लिए विपक्ष को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं, वहीं उत्तराखंड कांग्रेस ने पलटवार करते हुए केंद्र सरकार और भाजपा की मंशा पर सवाल उठाए हैं।

उत्तराखंड कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने भाजपा पर आरोप लगाया कि वह विपक्ष को महिला विरोधी दिखाने के लिए एक सुनियोजित नैरेटिव तैयार कर रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि भाजपा इस बिल को पास कराने के लिए गंभीर थी, तो बिल गिरने के तुरंत बाद महिला सांसदों के पास पहले से नारे लिखी तख्तियां कैसे मौजूद थीं। उनके अनुसार, यह पूरी तैयारी पहले से की गई थी, जिससे यह संकेत मिलता है कि भाजपा खुद इस बिल के गिरने की संभावना को भांप रही थी।

गोदियाल ने कहा कि यदि भाजपा वास्तव में बिल पारित कराना चाहती, तो वह अपने राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल कर विपक्षी सांसदों का समर्थन जुटा सकती थी। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा केवल राजनीतिक लाभ के लिए इस मुद्दे को इस्तेमाल कर रही है और अब जनता उसके “चाल और चरित्र” को समझ चुकी है।

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने केंद्र सरकार पर जनता को गुमराह करने और झूठ परोसने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि देश के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है जब प्रधानमंत्री ने राष्ट्र के नाम संदेश जैसे मंच का उपयोग विपक्ष की आलोचना के लिए किया, जो लोकतांत्रिक परंपराओं के विपरीत है।

इस मुद्दे पर उत्तराखंड के वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल ने भी केंद्र सरकार को घेरा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार महिलाओं के मुद्दे पर भ्रम फैला रही है। कुंजवाल ने कहा कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस शुरू से ही महिला आरक्षण की पक्षधर रही है और वर्ष 2023 में संसद के दोनों सदनों में इस बिल को पारित कराने में विपक्ष की अहम भूमिका रही थी।

उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि लोकसभा की 543 सीटों में 33 प्रतिशत महिला आरक्षण लागू करने में देरी क्यों की गई। कुंजवाल के अनुसार, केंद्र सरकार ने इस प्रक्रिया को जनगणना और परिसीमन से जोड़कर जानबूझकर टालने का प्रयास किया।

कुंजवाल ने दावा किया कि सरकार ने चुनावी माहौल को देखते हुए 16 अप्रैल 2026 को बिल की अधिसूचना जारी की और परिसीमन के माध्यम से राज्यों की सीटों में बदलाव कर राजनीतिक लाभ लेने की रणनीति बनाई। हालांकि, उन्होंने कहा कि विपक्ष की एकजुटता ने इस प्रयास को विफल कर दिया।

अंत में उन्होंने देश की महिलाओं से अपील की कि वे तथ्यों को समझें और किसी भी प्रकार के भ्रामक प्रचार से सावधान रहें। उन्होंने दोहराया कि कांग्रेस आज भी महिला आरक्षण को तत्काल लागू करने के पक्ष में है।


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