उत्तराखंड पुलिसकर्मी के बेटे ने रचा इतिहास, UKPSC में प्रदेशभर में तीसरी रैंक हासिल कर बने डीएसपी
देहरादून। उत्तराखंड लोक सेवा आयोग (UKPSC) की राज्य सिविल सेवा परीक्षा में टिहरी गढ़वाल के होनहार युवा मनीष चंद रमोला ने शानदार सफलता हासिल करते हुए पूरे प्रदेश में तीसरा स्थान प्राप्त किया है। इस उपलब्धि के साथ उनका चयन पुलिस उपाधीक्षक (DSP) पद के लिए हुआ है। मनीष की इस ऐतिहासिक सफलता से न केवल उनके पैतृक गांव और क्षेत्र में उत्साह का माहौल है, बल्कि पूरे उत्तराखंड को उन पर गर्व है।
मूल रूप से टिहरी गढ़वाल जनपद के चंबा ब्लॉक स्थित कखवाड़ी गांव के निवासी मनीष चंद रमोला की सफलता वर्षों की मेहनत, अनुशासन और संघर्ष का परिणाम है। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने अपने लक्ष्य को कभी आंखों से ओझल नहीं होने दिया और निरंतर परिश्रम के बल पर यह मुकाम हासिल किया।
मनीष के पिता रणवीर चंद रमोला उत्तराखंड पुलिस विभाग में अपनी ईमानदार और कर्तव्यनिष्ठ सेवाओं के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने देहरादून, श्रीनगर और वर्तमान में हरिद्वार सहित विभिन्न स्थानों पर अपनी सेवाएं देकर कानून व्यवस्था और जनसुरक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। वर्षों तक खाकी वर्दी पहनकर समाज की सेवा करने वाले पिता के लिए यह क्षण विशेष गर्व का है कि अब उनका बेटा पुलिस विभाग में अधिकारी बनकर सेवा की उसी परंपरा को आगे बढ़ाएगा।
मनीष की सफलता केवल एक व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि समर्पण, अनुशासन और पारिवारिक मूल्यों की भी जीत है। एक ओर पिता ने पूरी निष्ठा के साथ पुलिस सेवा में अपना योगदान दिया, वहीं दूसरी ओर बेटे ने उसी सेवा भावना को आगे बढ़ाते हुए अधिकारी बनने का सपना साकार किया।
परिजनों और शुभचिंतकों का कहना है कि मनीष बचपन से ही मेहनती, अनुशासित और लक्ष्य के प्रति समर्पित रहे हैं। उन्होंने अपनी कमियों को कभी बाधा नहीं बनने दिया और हर चुनौती का सामना दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ किया। यही कारण है कि आज उन्होंने प्रदेश की प्रतिष्ठित प्रतियोगी परीक्षा में शीर्ष स्थान हासिल कर युवाओं के लिए प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया है।
मनीष चंद रमोला की इस उपलब्धि पर क्षेत्रवासियों, सामाजिक संगठनों, जनप्रतिनिधियों तथा विभिन्न वर्गों के लोगों ने उन्हें बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है। उनकी सफलता ने यह साबित कर दिया है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और प्रयास निरंतर हों, तो किसी भी ऊंचाई को हासिल किया जा सकता है।
पिता-पुत्र की यह प्रेरक कहानी आज उत्तराखंड के लाखों युवाओं को यह संदेश दे रही है कि कठिन परिश्रम, अनुशासन और आत्मविश्वास के बल पर हर सपना साकार किया जा सकता है।
