हल्द्वानी के संस्थान को हाईकोर्ट से बड़ी राहत, BBA-BCA की संबद्धता के लिए 35 लाख की सिक्योरिटी डिपॉजिट पर रोक
नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने हल्द्वानी के लामाचौड़ स्थित एक शिक्षण संस्थान को बीबीए और बीसीए पाठ्यक्रमों की संबद्धता के लिए 35 लाख रुपये की सिक्योरिटी डिपॉजिट जमा कराने के मामले में अंतरिम राहत दी है। न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की एकलपीठ ने निर्देश दिए हैं कि मामले की अगली सुनवाई तक संस्थान से 14 दिसंबर 2016 के शासनादेश के आधार पर कोई सुरक्षा राशि नहीं ली जाएगी। अदालत ने इस मामले में प्रतिवादियों को छह सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने के निर्देश भी दिए हैं।
मामला कुमाऊं शिक्षा नगर (MIET Kumaun Shiksha Nagar) की ओर से दायर याचिका से जुड़ा है। संस्थान ने कुमाऊं विश्वविद्यालय की ओर से 7 जुलाई 2026 को जारी उस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, जिसमें बीबीए और बीसीए पाठ्यक्रमों की संबद्धता के लिए 35 लाख रुपये की सुरक्षा धनराशि जमा कराने को कहा गया था।
याचिकाकर्ता की ओर से अदालत में दलील दी गई कि विश्वविद्यालय की यह मांग मनमानी है और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के विनियमों के प्रावधान 3.2.2 के अनुरूप नहीं है। संस्थान का कहना था कि वह अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE) से विनियमित है। ऐसे में उससे अलग से सिक्योरिटी डिपॉजिट की मांग नहीं की जा सकती।
याचिका में यह भी तर्क दिया गया कि 14 दिसंबर 2016 का शासनादेश उन संस्थानों पर लागू होता है, जो किसी कानून अथवा अन्य नियामक व्यवस्था के तहत विनियमित नहीं हैं। इसलिए AICTE से विनियमित संस्थान पर इस शासनादेश के आधार पर सुरक्षा राशि जमा कराने की बाध्यता नहीं होनी चाहिए।
मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की एकलपीठ ने फिलहाल याचिकाकर्ता संस्थान को अंतरिम राहत देते हुए अगली सुनवाई तक 35 लाख रुपये की सिक्योरिटी डिपॉजिट नहीं लेने के निर्देश दिए। साथ ही प्रतिवादियों को छह सप्ताह के भीतर काउंटर एफिडेविट दाखिल करने को कहा है। अदालत ने स्टे एप्लीकेशन का भी निस्तारण कर दिया।
अब इस मामले में अगली सुनवाई 4 फरवरी 2027 को होगी। अदालत के अंतरिम आदेश से फिलहाल संस्थान को सुरक्षा धनराशि जमा कराने से राहत मिल गई है, जबकि मामले के अंतिम निस्तारण पर फैसला आगे की सुनवाई और पक्षकारों के जवाब के आधार पर होगा।
