उत्तराखंड कैबिनेट के बड़े फैसले: पर्वतीय क्षेत्रों में चकबंदी नीति को मंजूरी, होमस्टे में अब 8 कमरे तक अनुमति
देहरादून। मुख्यमंत्री Pushkar Singh Dhami की अध्यक्षता में 13 मई को आयोजित उत्तराखंड कैबिनेट बैठक में राज्य के विकास, स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यटन, पंचायतीराज और ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसलों पर मुहर लगाई गई। मंत्रिमंडल ने पर्वतीय क्षेत्रों में स्वैच्छिक/आंशिक चकबंदी नीति लागू करने सहित विभिन्न विभागों की नियमावलियों और पद सृजन से जुड़े प्रस्तावों को मंजूरी दी।
कैबिनेट द्वारा लिए गए प्रमुख निर्णयों में पर्वतीय क्षेत्रों के लिए “स्वैच्छिक/आंशिक चकबंदी प्रोत्साहन नीति-2026” को मंजूरी देना सबसे अहम माना जा रहा है। इसके तहत प्रत्येक पर्वतीय जिले में 10 गांवों को चिन्हित किया जाएगा। गांव के 75 प्रतिशत लोगों की सहमति के बाद चकबंदी समिति गठित होगी और डिजिटल नक्शों के माध्यम से प्रक्रिया पूरी की जाएगी। सरकार का मानना है कि इससे किसानों की बिखरी भूमि एक बड़े खेत में परिवर्तित होगी, कृषि कार्य आसान होगा और आपसी विवादों में कमी आएगी।
राजस्व विभाग में समीक्षा अधिकारी और सहायक समीक्षा अधिकारी सेवा नियमावली में संशोधन करते हुए अब अभ्यर्थियों के लिए 8 हजार की-डिप्रेशन प्रति घंटे की टाइपिंग स्पीड अनिवार्य की गई है। साथ ही माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस, विंडोज और इंटरनेट का बेसिक ज्ञान भी जरूरी होगा।
कैबिनेट ने सेलाकुई स्थित सगंध पौधा केंद्र (कैप) का नाम बदलकर “परफ्यूमरी एवं सगंध अनुसंधान एवं विकास संस्थान” करने को भी मंजूरी दी। वहीं उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के क्रम में न्याय विभाग में रजिस्ट्रार न्यायालय और केस मैनेजर के पद सृजित करने का निर्णय लिया गया।
स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग में भी कई अहम फैसले लिए गए। राजकीय मेडिकल कॉलेजों में कार्मिकों की कमी दूर करने के लिए संविदा पर संकाय सदस्यों के चयन की प्रक्रिया को सरल बनाया गया है। अब चयन सचिव स्तर पर किया जा सकेगा। इसके अलावा चिकित्सा शिक्षा निदेशालय के ढांचे का पुनर्गठन करते हुए 29 से बढ़ाकर 40 पद स्वीकृत किए गए हैं।
राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीनगर में कार्यरत 277 संविदा और दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को “समान कार्य-समान वेतन” देने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई। लैब तकनीशियन संवर्ग के पुनर्गठन के तहत 345 पदों को आईपीएचएस मानकों के अनुरूप पुनर्गठित किया गया है।
कैबिनेट ने महिला स्पोर्ट्स कॉलेज, लोहाघाट के सुचारू संचालन के लिए 16 नए पद सृजित करने को भी मंजूरी दी। वहीं लघु जल विद्युत परियोजना विकास नीति 2015 में संशोधन करते हुए परफॉर्मेंस सिक्योरिटी को शून्य करने और परियोजनाओं की समयसीमा तय करने का निर्णय लिया गया।
अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों की मान्यता प्रक्रिया को ऑनलाइन करने के लिए नई नियमावली को मंजूरी दी गई है। इससे मुस्लिम, जैन, ईसाई, बौद्ध, पारसी और सिख समुदाय के शैक्षणिक संस्थानों की मान्यता, नवीनीकरण और समाप्ति की प्रक्रिया ऑनलाइन माध्यम से संचालित होगी।
पंचायतीराज विभाग के अंतर्गत पंचायत भवन निर्माण की लागत को 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 20 लाख रुपये प्रति पंचायत भवन कर दिया गया है। वहीं विधि विज्ञान प्रयोगशाला विभाग में 15 नए पदों के सृजन को भी मंजूरी मिली।
पर्यटन क्षेत्र में बड़ा फैसला लेते हुए सरकार ने होमस्टे नियमों में संशोधन किया है। अब होमस्टे के तहत कमरों की संख्या 5 से बढ़ाकर 8 कर दी गई है। साथ ही ऑनलाइन फीस जमा होने पर रिन्यूअल स्वतः मान्य माना जाएगा, जिससे पर्यटन व्यवसाय को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
सरकार का कहना है कि इन फैसलों से राज्य में प्रशासनिक सुधार, रोजगार, स्वास्थ्य सेवाओं और पर्यटन विकास को गति मिलेगी।
